सीधा केस, ब्लैकलिस्टिंग और एंट्री बैन
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सरकारी कर्मचारियों से उलझे तो फंसेंगे कानूनी शिकंजे में, शासन का बड़ा एक्शन प्लान लागू

देहरादून।उत्तराखंड के सरकारी दफ्तरों में अब हंगामा, दबाव और अभद्रता का दौर खत्म करने की तैयारी हो चुकी है। अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बढ़ती बदसलूकी की घटनाओं के बाद शासन ने सख्त सुरक्षा कवच लागू कर दिया है। साफ संदेश है—सरकारी काम में बाधा डालना अब भारी पड़ेगा।

नई व्यवस्था के तहत ड्यूटी पर तैनात किसी भी कर्मचारी से गाली-गलौज, नारेबाजी, धक्का-मुक्की या मारपीट की स्थिति में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत तत्काल मुकदमा दर्ज होगा। आरोपी को मौके से बाहर किया जाएगा और भविष्य में सरकारी परिसरों में प्रवेश पर स्थायी रोक भी लगाई जा सकती है।

अब किसी भी अधिकारी के कमरे में एक समय में केवल दो लोगों को ही प्रवेश मिलेगा। भीड़ या प्रतिनिधिमंडल की बैठकें सिर्फ सीसीटीवी निगरानी वाले कॉन्फ्रेंस रूम में होंगी। वीआईपी के साथ आने वाले सशस्त्र सुरक्षाकर्मियों को अपने हथियार रिसेप्शन पर जमा कराने होंगे।

कार्यालयों में ऑडियो रिकॉर्डिंग से लैस एचडी सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिनकी रिकॉर्डिंग 90 दिनों तक सुरक्षित रखी जाएगी। अधिकारियों की डेस्क और रिसेप्शन काउंटर पर साइलेंट पैनिक बटन की व्यवस्था की जा रही है, ताकि आपात स्थिति में तुरंत सुरक्षा अलर्ट जारी हो सके।

अब आगंतुकों को फोटो पहचान पत्र के साथ डिजिटल एंट्री करनी होगी। सत्यापन के बाद क्यूआर कोड या RFID आधारित विजिटर पास जारी किया जाएगा, जिससे तय सीमा से बाहर जाना संभव नहीं होगा। वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य रहेगी।

हर कार्यालय में स्पष्ट आचार संहिता, दंडात्मक प्रावधान और आपातकालीन संपर्क नंबर प्रदर्शित किए जाएंगे। किसी भी घटना की जांच इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी द्वारा तय समय में पूरी की जाएगी और जरूरत पड़ने पर घटनास्थल को सील भी किया जा सकेगा।

सरकार का कहना है कि यह कदम कर्मचारियों को सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त कार्य वातावरण देने के लिए उठाया गया है। साफ है—अब सरकारी दफ्तरों में काम होगा नियमों से, न कि दबाव और हंगामे से।


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