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हापुड़ में अजीबोगरीब फर्जीवाड़ा: दो महिलाओं ने एक ही शख्स को बताया पति, सरकारी नौकरी के लिए बनवा डाले दो-दो मृत्यु प्रमाण पत्र

मामला उत्तराखंड के चमोली जिले से जुड़ा, असली पत्नी ने बताया – पति का असली मृत्यु प्रमाण पत्र उत्तराखंड प्रशासन ने जारी किया था

हापुड़/चमोली। उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां दो महिलाओं ने एक ही व्यक्ति को अपना पति बताया है और दोनों ने अलग-अलग नगरपालिकाओं से उसके मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिए। अब यह विवाद सरकारी नौकरी और मृतक आश्रित लाभ के लिए फर्जीवाड़े की ओर इशारा कर रहा है।

असल में यह मामला उत्तराखंड के चमोली जिले से जुड़ा है। जोशीमठ निवासी चंद्रकला वर्मा ने हापुड़ पुलिस को शिकायत दी है कि उनके पति अरुण कुमार वर्मा का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र हापुड़ नगर पालिका से बनवाया गया है। जबकि असली प्रमाण पत्र उत्तराखंड प्रशासन ने 19 जून 2024 को जारी किया था।

चंद्रकला के अनुसार, उनके पति अरुण वर्मा बुलंदशहर जिले के स्याना के रहने वाले थे और उत्तराखंड के गोपेश्वर जिला अस्पताल में वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। 1 जून 2024 को ड्यूटी के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया। पोस्टमार्टम के बाद 19 जून को उत्तराखंड सरकार ने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया।

चंद्रकला ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपने पति की ग्रेच्युटी और मृतक आश्रित नौकरी के लिए आवेदन किया, तभी उन्हें पता चला कि हापुड़ में रहने वाली एक महिला मीनू वर्मा ने भी खुद को अरुण वर्मा की पत्नी बताया है। इतना ही नहीं, मीनू ने हापुड़ नगर पालिका से दूसरा मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी नौकरी पाने के लिए आवेदन भी कर दिया।

चंद्रकला वर्मा का कहना है कि मीनू वर्मा ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी लाभ हड़पने की साजिश रची है। उन्होंने हापुड़ के एसपी कुंवर ज्ञानंजय सिंह से मिलकर पूरे मामले की शिकायत की और फर्जी प्रमाण पत्र रद्द करने व आरोपी महिला पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की।

इस पर हापुड़ के अपर पुलिस अधीक्षक विनीत भटनागर ने बताया कि एक ही व्यक्ति के नाम से दो अलग-अलग जगहों से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने की शिकायत मिली है। शिकायतकर्ता महिला का कहना है कि उत्तराखंड से जारी प्रमाण पत्र ही असली है, जबकि हापुड़ से बनवाया गया प्रमाण पत्र फर्जी है। पुलिस यह जांच कर रही है कि असली पत्नी कौन है और फर्जी दस्तावेज किसने तैयार करवाए।

वहीं हापुड़ नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी संजय मिश्रा ने कहा कि अब तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। जैसे ही शिकायत आएगी, जांच की जाएगी कि प्रमाण पत्र किस आधार पर जारी किया गया।

फिलहाल पुलिस और प्रशासन इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। यह मामला केवल पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि सरकारी दस्तावेजों में हो रहे फर्जीवाड़े और धांधली की भी पोल खोलता है। आने वाले दिनों में जांच के बाद साफ होगा कि असली सच क्या है और किसने धोखाधड़ी की साजिश रची।


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