तीन जगह बादल फटने से हर्षिल घाटी में तबाही, भागीरथी का प्रवाह थमा, झील बनी, बाढ़ का खतरा गहराया
उत्तरकाशी। उत्तराखंड की हर्षिल घाटी में मंगलवार को प्रकृति ने एक बार फिर कहर बरपाया। महज ढाई घंटे के भीतर तीन जगह बादल फटने की घटनाओं से धराली, हर्षिल और गंगनानी क्षेत्रों में हालात भयावह हो गए। इन घटनाओं से न सिर्फ जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ, बल्कि भागीरथी नदी का प्रवाह रुकने से अस्थायी झील बन गई है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
जलशक्ति मंत्रालय, भारत सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को दोपहर 1 बजे से लेकर साढ़े 3 बजे के बीच तीन बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गईं:
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दोपहर 1 बजे – खीरगंगा नदी क्षेत्र में बादल फटने से भारी मलबे और पानी के साथ बाढ़ आ गई।
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15 आवासीय मकान पूरी तरह तबाह हो गए।
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6 से 7 दुकानों को गंभीर नुकसान पहुंचा।
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कई लोगों के लापता होने की सूचना है।
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3 बजे – सुक्की टाप (हर्षिल-गंगनानी के बीच) में बादल फटने से क्षेत्र में आपदा जैसे हालात बन गए।
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जान-माल के नुकसान का आकलन जारी है।
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शाम 3:30 बजे – हर्षिल आर्मी कैंप के निकट तेल गाड़ में बादल फटने की तीसरी घटना हुई, जिससे भारी मात्रा में मलबा आने के कारण भागीरथी नदी का प्रवाह थम गया।
तेल गाड़ और अन्य स्थानों से आए भारी मलबे ने भागीरथी नदी के प्रवाह को बाधित कर दिया है, जिससे हर्षिल और धराली के बीच एक अस्थाई झील का निर्माण हो गया है। इसका सबसे सीधा असर हर्षिल हेलीपैड पर पड़ा है, जो पूरी तरह जलमग्न हो गया है। इस झील के बने रहने से जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे नीचे बसे गांवों और बस्तियों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
उत्तरकाशी जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने नदी किनारे बसे लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की है। कई स्थानों पर राहत और बचाव दल तैनात किए गए हैं। SDRF और आपदा प्रबंधन टीम लगातार स्थिति की निगरानी कर रही हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले 28 जून को यमुनाघाटी के सिलाई बेंड क्षेत्र और कुपड़ा गाड़ में बादल फटने की घटनाओं के कारण यमुना नदी का प्रवाह बाधित हुआ था, जिससे स्यानाचट्टी में झील बन गई थी और कई होटल व मकानों की निचली मंजिलें पानी में डूब गई थीं। फिलहाल वहां नदी के चैनलाइजेशन का काम जारी है।
