बागजाला में अनिश्चितकालीन धरना दूसरे दिन भी जारी
आठ सूत्रीय मांगों को लेकर उठी आवाज, मजदूर-किसान एकता से मिलेगा हक : के.के. बोरा

हल्द्वानी। बागजाला में भूमि के मालिकाना हक, बुनियादी सुविधाओं और राजस्व गांव बनाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय किसान महासभा द्वारा चल रहा अनिश्चितकालीन धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। धरने में ग्रामीणों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही।
धरने के दूसरे दिन मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए ट्रेड यूनियन ऐक्टू के प्रदेश महामंत्री के.के. बोरा ने कहा कि भाजपा शासन में बिना संघर्ष के जनता को कोई अधिकार नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा कि गरीबों के खिलाफ सरकार की “बुलडोजर नीति” उजाड़ने वाली है, बसाने वाली नहीं। बोरा ने जोर देकर कहा कि मजदूर और किसान एकता ही बागजाला वासियों के अधिकार की कुंजी है।
किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनन्द सिंह नेगी ने कहा कि प्रदेश की लगभग 67 प्रतिशत आबादी वन भूमि, नजूल भूमि और कच्ची जमीनों पर बसी है। सरकार को चाहिए था कि इतनी बड़ी आबादी को मालिकाना हक देती, लेकिन धामी सरकार सिर्फ उजाड़ने का काम कर रही है। दशकों से बसे लोगों को मालिकाना हक मिलना चाहिए।
धरने की अध्यक्षता पूर्व शिक्षक प्रेम सिंह नयाल ने की। उन्होंने कहा कि बागजाला के लोगों ने जाति-धर्म से ऊपर उठकर एकजुट होकर आंदोलन लड़ने का संकल्प लिया है।
धरने में गौलापार के खेड़ा गांव में 11 वर्षीय बालक की नृशंस हत्या के मामले में सीबीआई जांच की मांग का किसान महासभा ने समर्थन किया और सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया।
आठ सूत्रीय मांगें
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अतिक्रमण हटाने के नाम पर ग्रामीणों को दिये गये नोटिस रद्द किए जाएं।
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निर्माण कार्यों पर लगी रोक हटाई जाए।
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जल जीवन मिशन से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कर डामरीकरण/सीसी सड़क निर्माण किया जाए।
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जल जीवन मिशन की रोकी गई योजना हर घर नल, हर घर जल को शुरू किया जाए।
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पंचायत चुनाव से बाहर किए गए बागजाला के ग्रामीणों को मतदाता सूची में शामिल कर अधिकार बहाल किया जाए।
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बागजाला को राजस्व गांव घोषित कर ग्रामीणों को मालिकाना हक दिया जाए।
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गोवंश संरक्षण अधिनियम के चलते हुई रोक से हुए नुकसान की भरपाई हेतु सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए।
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नैनीताल जिले में वन भूमि व नजूल भूमि पर बसे सभी लोगों को मालिकाना हक दिया जाए।
