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राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की ‘डॉन–ड्रग एब्यूज एवं वेलनेस नेविगेशन’ योजना, 2025 पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर आयोजित

माननीय उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के दिशा-निर्देशानुसार तथा अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल/जिला न्यायाधीश श्री प्रशांत जोशी के निर्देशन में सिविल जज (सी०डि०)/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल श्रीमती पारुल थपलियाल द्वारा उपजिलाधिकारी एवं पुलिस विभाग के सहयोग से डॉ. राजेंद्र प्रसाद लॉ इंस्टीट्यूट, कुमाऊँ विश्वविद्यालय में ‘नालसा (डॉन–ड्रग एब्यूज एवं वेलनेस नेविगेशन) योजना, 2025’ विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

शिविर का शुभारंभ उपजिलाधिकारी श्री नवाजिश खलीक द्वारा किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को नशा उन्मूलन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी तथा अपने अनुभव साझा करते हुए उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि संगति व्यक्ति के जीवन और करियर को सकारात्मक या नकारात्मक दिशा दे सकती है। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों के साथ करियर काउंसलिंग पर भी संवाद किया।

इसके उपरांत सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा योजना की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य नशा पीड़ितों को निःशुल्क कानूनी सहायता एवं पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराना है, ताकि वे नशामुक्त एवं सम्मानजनक जीवन जी सकें। योजना के अंतर्गत नशा मुक्ति परामर्श, कानूनी सेवाएं, सरकारी योजनाओं तक पहुंच तथा सामाजिक समर्थन सुनिश्चित किया जाता है। साथ ही समाज में नशा उन्मूलन हेतु व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं।

योजना के प्रमुख बिंदुओं में नशा पीड़ितों की पहचान, उन्हें नशा मुक्ति केंद्रों से जोड़ना, निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराना, न्यायालय शुल्क में सहायता एवं विधिक परामर्श प्रदान करना शामिल है। नशा मुक्ति के पश्चात पीड़ितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने हेतु भी सहयोग दिया जाता है।

शिविर में विद्यार्थियों को NDPS Act (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज़ अधिनियम) के संबंध में जानकारी दी गई। बताया गया कि यह कानून मादक एवं मनोप्रभावी पदार्थों के उत्पादन, निर्माण, खरीद-फरोख्त, परिवहन और उपयोग को नियंत्रित करता है। अधिनियम के अंतर्गत नारकोटिक्स (जैसे चरस, गांजा, अफीम, हेरोइन, कोकेन) तथा साइकोट्रोपिक पदार्थ (जैसे एलएसडी, एमडीएमए, अल्प्राजोलम) शामिल हैं।

अधिनियम के तहत सजा का प्रावधान पदार्थ की मात्रा के आधार पर निर्धारित है—

छोटी मात्रा: 1 वर्ष तक का कारावास या ₹10,000 तक का जुर्माना अथवा दोनों।

मध्यम मात्रा: 10 वर्ष तक का कारावास एवं जुर्माना।

व्यावसायिक मात्रा: 10 से 20 वर्ष तक का सश्रम कारावास तथा ₹1 से ₹2 लाख तक का जुर्माना।

शिविर में सब-इंस्पेक्टर तल्लीताल मोहम्मद युसुफ द्वारा नैनीताल एवं आसपास के क्षेत्रों में पाए जाने वाले मादक पदार्थों तथा युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में संस्थान के एच०ओ०डी० श्री सुरेश चन्द्र पांडे, डॉ. कविता, डॉ. सागर सिंह, एस०आई० अंजुला जॉन एवं श्री यशवंत कुमार सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।


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