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शहीद भगत सिंह की जयंती पर बागजाला में संकल्प सभा, धरना 42वें दिन भी जारी

बागजाला। शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती (28 सितम्बर) पर अखिल भारतीय किसान महासभा की ओर से बागजाला के धरना स्थल पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भगत सिंह के प्रिय नारे “इंकलाब जिंदाबाद” से हुई। इस अवसर पर धार्मिक उन्माद के खिलाफ जन-जागरण का संकल्प लिया गया और “सरफरोशी की तमन्ना”, “मेरा रंग दे बसंती चोला” जैसे क्रांतिकारी गीतों के माध्यम से वातावरण गुंजायमान हो उठा।

सभा में वक्ताओं ने कहा कि आज के हालात में भगत सिंह के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। भाकपा (माले) जिला सचिव डॉ. कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, “जो सरकार जनता के बुनियादी अधिकारों पर हमला करे, उसे उखाड़ फेंकना जनता का अधिकार और कर्तव्य बन जाता है।” उन्होंने पेपर लीक घोटालों, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, दलित-आदिवासी और अल्पसंख्यकों पर हमलों तथा धार्मिक विभाजन जैसी स्थितियों को भगत सिंह की विचारधारा के खिलाफ बताया।

कांग्रेस अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष इन्दर पाल आर्य ने कहा कि शहीदों की कुर्बानियों की बदौलत ही आज हम स्वतंत्रता का आनंद ले रहे हैं। उन्होंने एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।
डॉ. उर्मिला रैस्वाल ने कहा कि भगत सिंह का सपना था भेदभाव रहित और समानता पर आधारित समाज का निर्माण करना, इसलिए आज मजदूर-किसानों के पक्ष में नीतियां बनाना आवश्यक है।
विमला देवी ने कहा कि बढ़ते जातीय और धार्मिक विभाजन तथा महिलाओं के उत्पीड़न को देखते हुए भगत सिंह के विचारों पर आधारित समाजवादी व्यवस्था की प्रासंगिकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

इस मौके पर वक्ताओं ने आठ सूत्रीय मांगों को दोहराते हुए बागजाला वासियों को मालिकाना अधिकार देने, निर्माण कार्यों पर लगी रोक हटाने और पंचायत चुनाव अधिकार बहाल करने जैसी प्रमुख मांगों पर जोर दिया।

धरना अपने 42वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इसमें डॉ. कैलाश पाण्डेय, डॉ. उर्मिला रैस्वाल, इन्दर पाल आर्य, विमला देवी, गोपाल सिंह बिष्ट, चन्दन सिंह मटियाली, हेमा आर्य, दीवान सिंह बर्गली, कैलाश, हरक सिंह बिष्ट, परवेज, सोहन लाल, दुर्गा देवी, भोला सिंह, गीता देवी, राधिका, हरीश, रेखा रानी, महेश राम, अनीता, कुलदीप सिंह, रुखसाना, रमेश चन्द्र, सुनीता, भागुली देवी, वासुदेव, भुवन चन्द्र, देवकी देवी, चंपा आदि बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।


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