नैनीताल–कैंची धाम जाने वालों की मौज! रोपवे सर्वे शुरू
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नैनीताल–कैंची धाम जाने वालों की मौज! रोपवे सर्वे शुरू, जाम से मिलेगी बड़ी राहत

उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों के लिए आने वाला समय सफर के लिहाज से कहीं अधिक आसान और सुहाना हो सकता है। मैदानों से नैनीताल, भीमताल और कैंची धाम तक पहुंचने में होने वाली भारी ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात दिलाने के उद्देश्य से केंद्र और राज्य सरकार के निर्देशों पर एक निजी कंपनी द्वारा रोपवे परियोजना का सर्वे कार्य शुरू कर दिया गया है। सर्वे की शुरुआत भीमताल क्षेत्र से की गई है, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों में नई उम्मीद जगी है।

नैनीताल और आसपास के पर्वतीय पर्यटन स्थलों पर सीजन के दौरान वाहनों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। खासतौर पर भवाली, भीमताल, नैनीताल और कैंची धाम मार्ग पर घंटों लंबा जाम आम बात हो गई है। इसी समस्या के स्थायी समाधान के रूप में रोपवे परियोजना को अहम माना जा रहा है।

रानीबाग से भीमताल तक पहला चरण
प्रस्तावित योजना के तहत रोपवे का पहला स्टेशन नैनीताल जिले के रानीबाग क्षेत्र में और दूसरा स्टेशन भीमताल में स्थापित किए जाने की संभावनाओं का सर्वे किया जा रहा है। इसके बाद भीमताल से भवाली, भवाली से नैनीताल और आगे कैंची धाम तक रोपवे विस्तार की संभावनाओं को भी सर्वे के जरिए परखा जा रहा है।

35 किलोमीटर लंबी होगी रोपवे लाइन
रोपवे कंपनी के सुपरवाइजर मयंक श्रीवास्तव ने बताया कि एजेंसी ने भीमताल से सर्वे कार्य की शुरुआत कर दी है। प्रस्तावित रोपवे परियोजना लगभग 35 किलोमीटर लंबी होगी, जिसमें करीब पांच प्रमुख स्टेशन बनाए जाने की योजना है। इनमें रानीबाग, भीमताल, भवाली, नैनीताल और कैंची धाम शामिल हैं। फिलहाल भीमताल के सिडकुल क्षेत्र में अत्याधुनिक मशीनों की मदद से सर्वे कार्य किया जा रहा है, ताकि तकनीकी और भौगोलिक संभावनाओं का आकलन किया जा सके।

पर्यटन और यातायात दोनों को मिलेगा लाभ
रोपवे परियोजना के पूरा होने के बाद पर्यटकों को जहां जाम और अव्यवस्थित यातायात से राहत मिलेगी, वहीं वे हवा में सफर करते हुए पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता का भी आनंद ले सकेंगे। इससे न सिर्फ यात्रा का समय कम होगा, बल्कि पर्यावरण पर वाहनों के बढ़ते दबाव में भी कमी आएगी।

पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार की यह पहल एक बड़ा और दूरगामी कदम मानी जा रही है। यदि सर्वे सफल रहता है और परियोजना धरातल पर उतरती है, तो कुमाऊं क्षेत्र के पर्यटन को नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


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