बागेश्वर में पर्यटन विकास से बदली ग्रामीण अंचलों की तस्वीर
✍ संवाददाता : सीमा खेतवाल
बागेश्वर। पर्यटन विकास और राज्य सरकार की योजनाओं के साथ जिला प्रशासन के अथक प्रयासों से बागेश्वर जिले की ग्रामीण तस्वीर तेजी से बदल रही है। सरकारी योजनाओं का लाभ अब सीधे गांवों तक पहुँच रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।
पर्यटन स्वरोजगार योजना ने युवाओं और महिलाओं को नए रोजगार दिए हैं, वहीं वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना ने परिवहन सेवाओं और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देकर जिले में रोजगार और सुविधाओं का दायरा बढ़ाया है।
इसके साथ ही, पंडित दीनदयाल गृह आवास योजना ने सुरक्षित और सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराते हुए होमस्टे व्यवसाय को मजबूती दी है। ट्रेकिंग ट्रैक्शन योजना ने साहसिक पर्यटन को प्रोत्साहित किया है और युवाओं को नए अवसर दिए हैं। वहीं, मातृ-पितृ प्रोत्साहन योजना ने परिवारों को आर्थिक सहयोग देकर ग्रामीण जीवन में स्थायित्व और समृद्धि का मार्ग खोला है।
मार्च 2024–25 से अब तक इन योजनाओं का सीधा लाभ अनेक लोगों को मिला है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में होमस्टे की सफल पहलें सामने आई हैं –
ममता मेहता का आशीर्वाद होमस्टे (कपकोट)
कमलेश सिंह रावत का रिवर होमस्टे (गागरीगोल)
मोहन चंद्र कांडपाल का वाटिका विस्टा होमस्टे (कौसानी)
हेमा देवी का कामाक्षी होमस्टे (कौसानी)
कलावती देवी का जय माँ लक्ष्मी होमस्टे (लीती)
गोपाल दत्त का जायका होमस्टे (छाती)
इन पहलों से न केवल परिवारों को स्थायी आजीविका मिली है, बल्कि महिलाएँ और युवा हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों और स्थानीय व्यंजनों से भी अपनी आय बढ़ा रहे हैं।
होमस्टे में ठहरने वाले पर्यटक बागेश्वर की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान मिली है। इन पहलों ने बागेश्वर को आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन का एक सशक्त केंद्र बना दिया है।
राज्य सरकार की सक्रिय पहल और विकास रणनीतियों के परिणामस्वरूप बागेश्वर आज पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग जगह बना रहा है। आने वाले समय में ये प्रयास न केवल हजारों लोगों की आजीविका सुनिश्चित करेंगे बल्कि जिले की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देकर बागेश्वर को उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करेंगे।
