रामनगर में सामजिक व राजनीतिक संगठनों का धरना प्रदर्शन — आरोपी भाजपा नेताओं की गिरफ्तारी और घायल नासिर को मुआवजा देने की मांग
हेट स्पीच व सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने वालों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत कार्रवाई की मांग, पुलिस पर लापरवाही का आरोप

रामनगर। विगत 23 अक्टूबर को बैलपड़ाव और छोई क्षेत्र में बड़े का मीट लेकर आ रहे वाहन चालक नासिर और अन्य पर हमला करने के मामले को लेकर क्षेत्र के सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने बुधवार को रामनगर तहसील परिसर में धरना प्रदर्शन किया।
धरने में शामिल संगठनों ने भाजपा समर्थित गुंडा तत्वों की तत्काल गिरफ्तारी, भाजपा नेता मदन जोशी और अन्य द्वारा दिए जा रहे हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कानूनी कार्रवाई, तथा घायल नासिर को 10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की।
संगठनों ने यह भी मांग की कि भाजपा से जुड़े असामाजिक तत्वों द्वारा की जा रही आईडी और वाहन चेकिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन रामनगर और पूरे उत्तराखंड में सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष संवैधानिक, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों की स्थापना के लिए है।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि भारतीय न्याय संहिता में सात वर्ष से अधिक सजा वाले मामलों में तत्काल गिरफ्तारी का स्पष्ट प्रावधान है, लेकिन रामनगर पुलिस भाजपा सरकार के दबाव में कानून का पालन नहीं कर रही है। आरोपियों पर मॉब लिंचिंग का प्रयास करने का मामला दर्ज है, फिर भी वे खुलेआम घूम रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मुकदमे में नामजद भाजपा नेता मदन जोशी लगातार सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से हेट स्पीच फैला रहे हैं, जबकि अप्रैल 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि हेट स्पीच करने वालों के खिलाफ पुलिस स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगी, लेकिन रामनगर पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है।

वक्ताओं ने कहा कि भाजपा नेताओं ने पहले गौ मांस की झूठी अफवाहें फैलाकर गांव के भोलेभाले युवाओं को अपराध के रास्ते पर धकेल दिया, और अब वे खुद को बचाने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि “आज हिंदुओं को खतरा मुसलमानों से नहीं, बल्कि आरएसएस और भाजपा की नीतियों से है।”
उन्होंने कहा कि जिन युवाओं के हाथों में डिग्री और रोजगार के प्रमाणपत्र होने चाहिए थे, उनके हाथों में हथियार, पत्थर और लाठियां थमा दी गई हैं।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार चिकित्सा, शिक्षा और रोजगार देने में विफल रही है, और अब अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए लव जिहाद, लैंड जिहाद, प्रेस जिहाद जैसे मुद्दों को उछालकर समाज में नफरत फैला रही है।
सभा में वक्ताओं ने कांग्रेस, नगर पालिका अध्यक्ष और सभासदों से भी सवाल किया कि वे इस गंभीर घटना पर चुप क्यों हैं, और स्थानीय विधायक अभी तक घायल नासिर का हाल जानने उसके घर क्यों नहीं पहुंचे।
आंदोलनकारियों ने प्रशासन को दो दिन का समय देते हुए चेतावनी दी कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो 31 अक्टूबर को शाम 4 बजे व्यापार भवन में अगली रणनीति तय की जाएगी।
धरने को समाजवादी लोक मंच के मुनीष कुमार, जिशान कुरेशी, मौ. नबी अंसारी, इंकलाबी मजदूर केंद्र के रोहित रुहेला, महिला एकता मंच की ललिता रावत, सरस्वती जोशी, चांद खान, आइसा नेता सुमित कुमार, जगमोहन रावत, किसान संघर्ष समिति के ललित उप्रेती, मौ. अकरम, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के मौ. आसिफ, शोएब कुरेशी, असलम, सलीम कुरेशी, दानिश कुरेशी सहित अनेक लोगों ने संबोधित किया।
