राजस्व को चूना, नियमों की धज्जियां! ऋषिकेश उप निबंधक पर गिरी गाज, जिलाधिकारी सविन बंसल की औचक छापेमारी
देहरादून। ऋषिकेश उप निबंधक कार्यालय में व्याप्त अनियमितताओं पर जिला प्रशासन की कड़ी कार्रवाई सामने आई है। जिलाधिकारी सविन बंसल की औचक छापेमारी में सामने आई गंभीर खामियों के बाद शासन ने ऋषिकेश के उप निबंधक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है।
लगातार मिल रही जन शिकायतों के बाद डीएम ने उप जिलाधिकारी ऋषिकेश और जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) देहरादून की मौजूदगी में कार्यालय का संयुक्त निरीक्षण किया। जांच रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले थे।
निरीक्षण में पाया गया कि उप निबंधक बिना किसी पूर्व सूचना के कार्यालय से अनुपस्थित थे। उनकी अनुपस्थिति में निबंधक लिपिक द्वारा अवैधानिक तरीके से विलेखों का पंजीकरण किया जा रहा था। इतना ही नहीं, एक कथित “घोस्ट कर्मचारी” भी कार्यालय में कार्यरत मिला, जिसका न तो कोई नियुक्ति पत्र था और न ही उपस्थिति पंजिका में नाम दर्ज था।
कार्यालय में पंजीकृत दस्तावेज महीनों, बल्कि वर्षों तक लंबित पाए गए। अर्जेंट रजिस्ट्री नकल, जिसे 24 घंटे के भीतर जारी किया जाना चाहिए, वह भी कई महीनों से लंबित थी। सैकड़ों मूल विलेख अलमारियों में धूल फांकते मिले, जबकि फरियादियों ने बताया कि निर्धारित तीन दिन की समय-सीमा के बावजूद उनके मूल दस्तावेज वापस नहीं किए गए और प्रमाणित प्रतियां देने में भी अनावश्यक देरी की गई।
सबसे गंभीर मामला औद्योगिक भूमि को आवासीय दरों पर पंजीकृत किए जाने का सामने आया। जांच में ग्राम माजरी ग्रांट, तहसील डोईवाला स्थित दून घाटी विशेष महायोजना 2031 के अंतर्गत आरक्षित औद्योगिक भूमि को छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर आवासीय दरों पर रजिस्ट्री किए जाने की प्रक्रिया पाई गई। इससे शासन को भारी राजस्व क्षति होने की आशंका जताई गई है।
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि उप निबंधक द्वारा भारतीय स्टाम्प (उत्तराखण्ड संशोधन) अधिनियम 2015 की धारा 47(क), भारतीय रजिस्ट्रेशन मैनुअल के नियम 325, 195 एवं 196 तथा शासन की अधिसूचना संख्या 368 दिनांक 28.04.2016 का अनुपालन नहीं किया गया। संपत्ति मूल्यांकन संबंधी नियमों की अनदेखी के कारण स्टाम्प अपवंचना के मामले भी सामने आए।
जिला प्रशासन ने साफ किया है कि राजस्व हितों से खिलवाड़, भ्रष्टाचार और लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जीरो टॉलरेंस नीति के तहत आगे भी ऐसे औचक निरीक्षण जारी रहेंगे और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

