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बागेश्वर में राष्ट्रीय कुमाउनी पुस्तकालय का पाँचवाँ स्थापना दिवस सादगी से मनाया गया

संवाददाता : सीमा खेतवाल

बागेश्वर। पाँचवाँ राष्ट्रीय कुमाउनी पुस्तकालय स्थापना दिवस सादगीपूर्ण वातावरण में देवकी लघु वाटिका, मंडलसेरा बागेश्वर में मनाया गया। इस अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें नवोदित कवियों और बालक-बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

वाटिका की संरक्षक देवकी देवी ने कार्यक्रम में उपस्थित नवोदित कवियों को मौसमी फल एवं मिष्ठान वितरित किए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अपनी बोली-भाषा और संस्कृति का उपहास आने वाले समय में समाज के लिए अत्यंत कष्टकारी सिद्ध होगा। उन्होंने कुमाउनी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए उत्तराखंड सरकार से अविलंब प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजने की अपील की। उन्होंने कहा कि पहाड़ी संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ सामरिक दृष्टि से भी यह कदम अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम में किशन मलड़ा ने बच्चों के उत्साहवर्धन हेतु दिनपत्रिका एवं कलम भेंट की। उन्होंने सभी साथियों से पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों का अधिक से अधिक निःशुल्क सदुपयोग करने का आग्रह किया तथा कहा कि बोली-भाषा के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय पर्यावरण संरक्षण की सामान्य जानकारी हम सभी के लिए आवश्यक है।

इस अवसर पर रमा देवी, मनीषा, दिव्या, वैभव बिष्ट, करण, अंजली, हेमंत सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं बालक-बालिकाएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण एवं प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ।


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