पुछड़ी प्रकरण तूल पकड़ता गया: जनसंगठनों ने गिरफ्तारी और दमन के खिलाफ मोर्चा खोला
रामनगर पुछड़ी विवाद: गरीबों की बस्तियाँ उजाड़ने पर बवाल, प्रमुख सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता गिरफ्तार
रामनगर (नैनीताल) के वन ग्राम पुछड़ी में गरीब, दलित, श्रमिक और अल्पसंख्यक परिवारों को बिना पुनर्वास हटाए जाने को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक संगठनों का विरोध तेज हो गया है। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी,भाकपा (माले) (उपपा) और परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) सहित कई जनसंगठनों ने इस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताते हुए 15 से अधिक सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। विरोध में अल्मोड़ा के शिखर तिराहे पर राज्य सरकार का पुतला दहन भी किया गया।
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उपपा: गरीबों की बस्तियाँ उजाड़ने के खिलाफ प्रदर्शन, नेताओं की रिहाई की मांग
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पी.सी. तिवारी ने कहा कि पुछड़ी क्षेत्र में वर्षों से बसे गरीब मजदूर परिवारों को बिना नोटिस, बिना पुनर्वास और बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उखाड़ा जा रहा है। पार्टी के अध्यक्ष पी.सी. तिवारी ने आरोप लगाया कि अतिक्रमण हटाने की आड़ में गरीबों पर दमन किया जा रहा है और कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हो रहा है।
पी.सी. तिवारी ने कहा कि सरकार अतिक्रमण हटाने के नाम पर गरीब मजदूर परिवारों की बस्तियों को ग़ैर-कानूनी तरीके से ध्वस्त कर बेघर कर रही है। इस पूरी कार्रवाई में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है, जो बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने प्रधान महासचिव प्रभात ध्यानी, समाजवादी लोक पंच के मुनीश कुमार सहित गिरफ्तार किए गए सभी नेताओं और महिला कार्यकर्ताओं की फौरन रिहाई की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मनमानी और दमनकारी कार्रवाई नहीं रुकी तो बड़े आंदोलन खड़े होंगे।
भाकपा (माले): एसएसपी के बयान को साम्प्रदायिक और संविधान-विरोधी बताया
भाकपा माले ने भी पुछड़ी में चल रही कार्रवाई का पुरजोर विरोध किया। नैनीताल जिला सचिव डॉ. कैलाश पाण्डेय ने कहा कि दशकों से रह रहे गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों के घरों पर बिना पुनर्वास बुलडोजर चलाना मानवता और लोकतंत्र दोनों के खिलाफ है।
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उन्होंने नैनीताल एसएसपी द्वारा जारी वीडियो बयान को “चौंकाने वाला, गैरजिम्मेदाराना और संविधान विरोधी” बताया। पाण्डेय के अनुसार डेमोग्राफी बदलने की बात कहना अनुच्छेद 14-18 का उल्लंघन है और पुलिस की भूमिका कानून व्यवस्था बनाए रखने की है, न कि जनसांख्यिकीय बदलाव का मूल्यांकन करने की।
माले ने कहा कि गरीबों को हटाने से पहले उन्हें पुनर्वास व मुआवजा देना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
पुछड़ी में कड़ी घेराबंदी, मीडिया तक को प्रवेश नहीं
जनसंगठनों ने आरोप लगाया कि पुछड़ी गांव को चारों ओर से बैरिकेडिंग कर “जीरो जोन” घोषित कर दिया गया है। मीडिया और आम नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। कई परिवारों के पास कोर्ट से स्टे होने और कई के नोटिस के उत्तर लंबित होने के बावजूद प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी।
जिन लोगों ने आवाज उठाई, उन्हें शांति भंग की आशंका में नोटिस देकर हिरासत में ले लिया गया। कुल प्रमुख सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई अन्य को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है।
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) के इकाई सचिव महेश ने कहा—“यह कार्रवाई पूरी तरह अन्यायपूर्ण और अमानवीय है। वर्षों से रह रहे गरीबों को बिना पुनर्वास उजाड़ना लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन है। हम सरकार से मांग करते हैं कि सभी गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं और नागरिकों को तत्काल रिहा किया जाए और पुछड़ी की बस्ती को उजाड़ने की कार्रवाई तुरंत रोकी जाए। यदि किसी को हटाना आवश्यक है तो पहले पुनर्वास और मुआवजा सुनिश्चित किया जाए।”
जनसंगठनों की मांगें
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गिरफ्तार किए गए सभी कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा किया जाए
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पुछड़ी और अन्य वन गांवों में बुलडोजर कार्रवाई तुरंत रोकी जाए
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दशकों से निवासरत परिवारों को वहीं रहने का अधिकार (मालिकाना हक) दिया जाए
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यदि विस्थापन आवश्यक हो तो पहले पुनर्वास और मुआवजा सुनिश्चित किया जाए
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दलितों, गरीबों, अल्पसंख्यकों और श्रमिकों को उजाड़ने की कार्रवाई बंद की जाए
