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उत्तराखंड क्रांति दल नैनीताल इकाई द्वारा पूर्व विधायक दिवाकर भट्ट एवं कॉमरेड राजा बहुगुणा को श्रद्धांजलि

नैनीताल। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) नैनीताल इकाई की अगुवाई में राज्य अतिथि गृह में राज्य आंदोलनकारी, यूकेडी के पूर्व विधायक दिवाकर भट्ट तथा सीपीआई के वरिष्ठ नेता कॉमरेड राजा बहुगुणा के सम्मान में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता नैनीताल नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष श्याम नारायण ने की। सभा की शुरुआत दोनों दिवंगत नेताओं के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई।

कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्ध जन, अधिवक्ता, शिक्षक, कर्मचारी नेता और रंगकर्मियों ने बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज की।

सभा को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल ने कहा कि दिवाकर भट्ट सच्चे आंदोलनकारी थे। उन्होंने राज्य हित के लिए संघर्ष करते हुए व्यक्तिगत पीड़ाएँ झेलीं और अंतिम सांस तक युवाओं को राज्य निर्माण की लड़ाई जारी रखने का आह्वान करते रहे।

उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों के लिए राज्य बनाया गया—जैसे राजधानी का स्थायी निर्धारण, मूल निवासी नीति, भू-क़ानून—वे आज भी अनसुलझे हैं। दिल्ली से संचालित नीतियाँ उत्तराखंड की पीड़ा को नहीं समझतीं, जबकि राज्य अपने हित में कानून बना सकता है।

डॉ. जंतवाल ने कहा कि प्रसिद्ध वैज्ञानिक डाॅ. डी.डी. पंत ने भी पर्वतीय क्षेत्रों के अनुरूप नीतियाँ बनाने और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया था, अन्यथा इसका दुष्प्रभाव पूरे देश पर पड़ेगा।

यूकेडी नेताओं ने कहा कि राज्य सीमांत भूभाग वाला है, और यदि सीमांत गाँवों में मूलभूत सुविधाएँ नहीं दी गईं तो पलायन बढ़ेगा तथा चीन की घुसपैठ की संभावनाएँ भी चिंता का विषय बनी रहेंगी। राज्य को सीमित अधिकारों के साथ सौंपा गया है और अपने ही संसाधनों पर राज्यवासियों का अधिकार आज भी कमजोर है। इसलिए जनता को राजनीतिक परिवर्तन के लिए आगे आना होगा।

डॉ. जंतवाल ने बताया कि कॉमरेड राजा बहुगुणा ने जीवनभर शोषित, पीड़ित और श्रमिक वर्ग की लड़ाई लड़ी। “नशा नहीं, रोजगार दो” आंदोलन के दौरान उन्हें व खुद जंतवाल को एक साथ गिरफ्तार किया गया था। बहुगुणा को उत्तराखंड की सशक्त आवाज बताया गया।

सभा को पूर्व जीएम पर्यटन डी. के. शर्मा, एडवोकेट कैलाश तिवारी, पान सिंह सीज़वाली, राज्य आंदोलनकारी जिलाध्यक्ष गणेश सिंह बिष्ट, रंगकर्मी विनोद कुमार, महेश जोशी, पंकज भट्ट, मनोज बिष्ट, खुर्शीद हुसैन, लीला बोरा, हेमचंद्र वारियल, कंचन चंदोला, शाकिर अली सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।

सभी वक्ताओं ने कहा कि जनता के मुद्दे उठाने वाले दोनों महान व्यक्तित्वों को खोना अत्यंत दुखद है।

सभा की अध्यक्षता कर रहे श्याम नारायण ने कहा कि समाज के लिए तन-मन से संघर्ष करने वाले दो अनमोल रत्नों का जाना प्रदेश के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि जिन आदर्शों के लिए दोनों नेताओं ने त्याग किया, उन आदर्शों पर चलकर समाज के निर्माण में योगदान दें।

कार्यक्रम में डॉ. मनोज बिष्ट, मनोज साह, पार्वती मेहरा, संध्या शर्मा, मदन सिंह, के.सी. उपाध्याय, पी.सी. पंत, भावना जोशी, रायरा, वीरेन्द्र जोशी, प्रताप बिष्ट, इंद्रजीत बिष्ट, धीरेन्द्र बिष्ट, नवीन जोशी, आनंद बिष्ट समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।


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