देवभूमि जन हुंकार, स्याल्दे / अल्मोड़ा / हल्द्वानी: उत्तराखंड के पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलती एक गंभीर खबर अल्मोड़ा जनपद के स्याल्दे विकासखंड से सामने आई है। विकासखंड के अंतर्गत आने वाले राजकीय इंटर कॉलेज (रा.इ.का.) मालीखेत में लगभग 250 छात्र-छात्राएं अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, परंतु विडंबना यह है कि विगत कई वर्षों से इस विद्यालय में विज्ञान वर्ग की कक्षाएं संचालित ही नहीं हो पा रही हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय जनता और अभिभावक संघ में गहरा रोष व्याप्त है।
क्षेत्रीय जनता के समक्ष सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि आखिर हमारे गांव और सीमांत क्षेत्र के बच्चों को विज्ञान की पढ़ाई का अवसर क्यों नहीं मिलना चाहिए? क्या पहाड़ के बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक या अन्य तकनीकी क्षेत्रों में अपना उज्ज्वल भविष्य नहीं बना सकते? जब राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों के बच्चे तमाम कठिन परिस्थितियों और भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद शिक्षा के लिए निरंतर संघर्ष कर रहे हैं, तब उनके अपने क्षेत्र के स्थानीय विद्यालय में ही आवश्यक विषय और योग्य शिक्षकों का उपलब्ध न होना शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
हाल ही में संपन्न हुई अभिभावक संघ की बैठक में क्षेत्रीय जनता ने एक सुर में सरकार और शिक्षा विभाग के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
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रा.इ.का. मालीखेत में विज्ञान वर्ग की कक्षाएं तत्काल प्रभाव से शुरू की जाएं ताकि छात्र विज्ञान विषयों की शिक्षा प्राप्त कर सकें।
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विद्यालय में सभी रिक्त विषयों के लिए पर्याप्त और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की जाए ताकि पढ़ाई बाधित न हो।
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विद्यार्थियों के लिए आवश्यक शैक्षणिक प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
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सीमांत क्षेत्र के इस विद्यालय को केंद्रीय विद्यालय, सैनिक विद्यालय अथवा जवाहर नवोदय विद्यालय जैसी बेहतर और उन्नत शैक्षणिक व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में ठोस पहल की जाए।
वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह केवल एक अकेले विद्यालय की मांग नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के होनहार बच्चों के भविष्य की मांग है। आज अगर हम अपने बच्चों के अधिकार और भविष्य के लिए आवाज नहीं उठाएंगे, तो आने वाली पीढ़ियां हमसे सवाल करेंगी। संबंधित विभागों, क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन से विनम्र लेकिन पुरजोर अपील की गई है कि इस संवेदनशील विषय को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र अति शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई की जाए। मालीखेत के बच्चों को भी वही बराबरी के अवसर मिलने चाहिए, जो शहरों के बच्चों को मिलते हैं। क्षेत्रवासियों ने अपील की है कि इस आवाज को आगे बढ़ाएं, पोस्ट शेयर करें और जनप्रतिनिधियों तक बात पहुंचाएं।
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