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सोराग-कपकोट: दो साल से अधूरी पुल और सड़क, ग्रामीणों को उठानी पड़ रही हैं भारी परेशानियाँ

संवाददाता सीमा खेतवाल

बागेश्वर ज़िला | कपकोट ब्लॉक | ग्राम – सोराग: वर्ष 2022 में जिस सड़क और पुल के निर्माण का वादा किया गया था, वह आज दो साल बाद भी अधूरा पड़ा है। ग्राम सोराग से कपकोट को जोड़ने वाली यह सड़क अब भी टूटी-फूटी हालत में है और बीच में पुल न बनने के कारण ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

हाल ही में एक ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे 12 किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाया गया, क्योंकि न तो वाहन रास्ते में चल सकते हैं और न ही कोई वैकल्पिक पुल बचा है। लगातार भारी बारिश के चलते ग्रामीणों द्वारा अस्थायी रूप से बनाई गई लकड़ी की पुलिया भी बह गई।

इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं लोकपाल सिंह और हिमानु जैसे ग्रामीण, जिनकी गाड़ियां गाँव में ही फंसी रह गई हैं। लोकपाल सिंह की आजीविका पूरी तरह से वाहन पर निर्भर थी। उसी गाड़ी से वह अपने पूरे परिवार का भरण-पोषण करते थे, बच्चों की फीस भरते थे, और बागेश्वर में लिए गए किराए के कमरे का खर्च उठाते थे। अब उनकी आजीविका पूरी तरह बंद हो चुकी है।

गांव में न तो कोई अस्पताल है, न अच्छे शिक्षक, न सड़क, न ही पुल। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह नदारद हैं। बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर बागेश्वर में किराए के कमरों में रहना पड़ रहा है।

ग्रामीणों की मांग:

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुल और सड़क पूरी नहीं बनती, तब तक रोजमर्रा की जिंदगी नारकीय बनी रहेगी। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपील की जा रही है कि जल्द से जल्द अधूरे पुल और सड़क निर्माण को पूरा कराया जाए, जिससे गाँव के लोग सामान्य जीवन जी सकें।

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