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पंचायत चुनाव में प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए नैनीताल जिला पंचायत के अधिवक्ता रवींद्र सिंह बिष्ट ने दिया इस्तीफा

👉 कहा– अपहरण और साजिश ने लोकतंत्र को किया कलंकित

नैनीताल। जिला पंचायत नैनीताल की ओर से बीते दो दशकों से उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल एवं उत्तराखंड लोक सेवा अधिकरण, नैनीताल पीठ में जिला पंचायत के मामलों की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र सिंह बिष्ट ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है।

अधिवक्ता बिष्ट ने जिला पंचायत प्रशासन और जिलाधिकारी नैनीताल को लिखे अपने पत्र में कहा कि 14 अगस्त को जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के दौरान पांच निर्वाचित सदस्यों के अपहरण की घटना ने लोकतंत्र और कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि यह अपहरण केवल कुछ लोगों की करतूत नहीं बल्कि “खतरनाक साजिश” थी, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं।

बिष्ट ने पत्र में उल्लेख किया कि इस घटना ने न सिर्फ जनता के बीच डर और असुरक्षा का वातावरण पैदा किया, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भी कलंकित किया है। चुनाव के समय हुए इस अपहरण और उसके बाद की परिस्थितियों ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्वाचन को सीधे तौर पर प्रभावित किया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी परिस्थिति में उनके लिए जिला पंचायत के अधिवक्ता के रूप में कार्य करना नैतिक रूप से उचित नहीं है।

उन्होंने तत्काल प्रभाव से स्वयं को जिला पंचायत नैनीताल के अधिवक्ता पद से मुक्त करने का अनुरोध किया है।

यह इस्तीफा उस समय आया है जब नैनीताल जिले में पंचायत चुनाव और उससे जुड़े विवाद पहले ही सुर्खियों में बने हुए हैं। अधिवक्ता बिष्ट के इस कदम को प्रशासन और राजनीतिक हलकों में गम्भीरता से लिया जा रहा है।


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