रामनगर में समाजवादी लोक मंच का जन सम्मेलन
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उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण: रामनगर में समाजवादी लोक मंच का जन सम्मेलन, जनता बोली— “ये वो उत्तराखंड नहीं जिसके लिए दी गई थीं कुर्बानियां”

रामनगर में समाजवादी लोक मंच का जन सम्मेलन
रामनगर में समाजवादी लोक मंच का जन सम्मेलन

रामनगर। उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर समाजवादी लोक मंच की ओर से रामनगर के पायते वाली रामलीला मैदान में भव्य जन सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन ललिता रावत व लक्ष्मी सिंह ने संयुक्त रूप से किया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिलाओं और युवाओं ने भाग लिया।

जनसभा में लोगों ने एक स्वर में कहा कि “आज का उत्तराखंड वह नहीं है जिसके लिए आंदोलनकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी।” वक्ताओं ने कहा कि जिन आदर्शों और सवालों को लेकर 90 के दशक में राज्य आंदोलन चला था, वे आज भी अधूरे हैं।

सरकार पर गंभीर आरोप

वक्ताओं ने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय पेपर लीक और भाई-भतीजावाद को बढ़ावा दे रही है। भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों ने जनता की समस्याओं के समाधान के बजाय सत्ता का लाभ उठाकर लूट-खसोट की है। उन्होंने कहा कि यशपाल आर्य, सतपाल महाराज, हरक सिंह रावत, विजय बहुगुणा, रेखा आर्य और सरिता आर्य जैसे नेताओं का बार-बार दल बदलना इस अवसरवाद की मिसाल है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रति व्यक्ति आय 2.73 लाख रुपये होने के दावे पर भी सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि यदि राज्य की प्रति परिवार औसत आय 13 लाख रुपये से अधिक है, तो फिर भोजन माताओं को केवल 36 हजार और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को एक-डेढ़ लाख रुपये वार्षिक वेतन क्यों दिया जा रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की संपदा राजनेताओं, पूंजीपतियों, ठेकेदारों और अफसरशाही की जेब में जा रही है।

पलायन और पर्यावरण संकट पर चिंता

वक्ताओं ने कहा कि 25 वर्षों में जल विद्युत परियोजनाओं, ऑल वेदर रोड और जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक ने उत्तराखंड के पर्यावरण और जनजीवन को तहस-नहस कर दिया है।
प्रदेश के 200 से अधिक वन ग्रामों को अब तक पंचायत चुनावों में भागीदारी, बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिली हैं। पलायन के कारण 1700 से अधिक गांव भूतहा हो चुके हैं।

साम्प्रदायिकता के बढ़ते खतरे पर भी की गई चर्चा

सभा में कहा गया कि सरकार जनसमस्याओं के समाधान की जगह साम्प्रदायिकता फैलाने में लगी है। ऐसे में आम जनता, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और युवाओं को एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष तेज करना होगा।

संघर्ष के नए संकल्प के साथ गूंजा सम्मेलन

जन सम्मेलन में समाजवादी लोक मंच के संयोजक मुनीष कुमार, उपपा नेता पीसी जोशी, जनकवि बल्ली सिंह चीमा, वन पंचायत संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष तरुण जोशी, सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष इस्लाम हुसैन, महिला एकता मंच की भगवती आर्य, किसान संघर्ष समिति के ललित उप्रेती, भाकपा (माले) के अमन, अंजू, मेघा, माही, कैसर राना तथा वन ग्राम संघर्ष समिति सुंदरखाल के अध्यक्ष प्रेम राम आदि ने संबोधित किया।
सभा के अंत में सभी वक्ताओं ने जनता से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सौहार्द के लिए संघर्ष को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।


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