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एसडीएम हल्द्वानी के आश्वासन पर बागजाला आंदोलन 100वें दिन दो हफ्ते के लिए स्थगित

काम न हुआ तो 15 दिन बाद प्रशासनिक कार्यालयों पर होगा “डेरा डालो, घेरा डालो” आंदोलन

बागजाला, नैनीताल। मालिकाना अधिकार, राजस्व गाँव बनाने, मताधिकार बहाल करने, निर्माण कार्यों पर लगी रोक हटाने, टूटी सड़कों के पुनर्निर्माण, जल जीवन मिशन के कार्य पूरे करने तथा आवारा गोवंश से ग्रामीणों को राहत दिलाने सहित कई प्रमुख मांगों को लेकर पिछले 100 दिनों से चल रहा बागजाला का आंदोलन ऐतिहासिक मोड़ पर पहुँच गया है। एसडीएम हल्द्वानी के लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन को दो हफ्ते के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया गया।

संगठनों ने साफ कहा है कि यदि 15 दिनों में वादे के अनुसार कार्य नहीं हुए, तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा, लेकिन इस बार धरना गांव में नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों पर “डेरा डालो, घेरा डालो” के रूप में आयोजित किया जाएगा।

प्रशासन जनता की एकता के आगे झुका : इंद्रेश मैखुरी

बागजाला के धरना स्थल पर 100वें दिन आयोजित सभा को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि किसान महासभा के नेतृत्व में बागजाला के लोगों ने एक ऐतिहासिक संघर्ष किया है।
उन्होंने कहा कि —

“आज प्रशासन जनता की एकता के बल पर झुका है। राज्य में प्रहलाद पलसिया, शक्ति फार्म, उपनल कर्मियों, चौखुटिया-घनसाली और स्यालदे में भी आंदोलन चल रहे हैं, लेकिन सरकार के पास समाधान नहीं, केवल बुलडोजर है।”

इंद्रेश मैखुरी ने आरोप लगाया कि आंदोलन के बूते बने राज्य की भाजपा सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनके दमन पर उतारू है।

किसान महासभा शुरू करेगी वन भूमि व खत्ता क्षेत्रों में बड़ा आंदोलन : आनंद सिंह नेगी

अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनंद सिंह नेगी ने कहा कि बागजाला के लोगों ने चाहे गर्मी हो या बरसात—हर परिस्थिति में संघर्ष कर आंदोलन को मजबूती दी है।
उन्होंने घोषणा की कि —

“यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक बागजाला सहित सभी वन भूमि व नजूल भूमि पर बसे लोगों को मालिकाना हक नहीं मिल जाता। किसान महासभा शीघ्र ही पूरे प्रदेश में वन गांवों व खत्ता वासियों को जोड़कर एक वृहत्त आंदोलन की शुरुआत करेगी।”

एसडीएम ने दिए थे ये प्रमुख आश्वासन

कल एसडीएम हल्द्वानी के नेतृत्व में प्रशासन, वन विभाग, पीडब्ल्यूडी सहित अन्य विभागों के अधिकारियों ने यह आश्वासन दिया था—

  • रुकी हुई सड़क का निर्माण एक सप्ताह में शुरू होगा

  • निर्माण और विकास कार्यों पर लगी रोक हटाने पर प्रस्ताव तैयार किया जाएगा

  • पेयजल योजना का प्रस्ताव जल संस्थान भेजेगा, जिस पर वन विभाग स्वीकृति देगा

  • मालिकाना अधिकार का प्रस्ताव प्रशासन से शासन को भेजा जाएगा

इसी आधार पर आंदोलन को दो सप्ताह स्थगित करने का निर्णय लिया गया।

धरना स्थल पर 100वें दिन आंदोलनकारियों को संबोधित करने वालों में मुख्य रूप से—
आनंद सिंह नेगी, इंद्रेश मैखुरी, डॉ. कैलाश पाण्डेय, तुला सिंह तड़ियाल, बी.आर. धौनी, मदन कठायत, डॉ. उर्मिला रैसवाल, प्रेम सिंह नयाल, सुलेमान मलिक, हेमा देवी, विमला देवी सहित कई वक्ता शामिल रहे।

इस अवसर पर ललित मटियाली, विष्णु पद साना, अनीता अन्ना, परवेज, दुर्गा देवी, तुलसी देवी, हेमा आर्या, भोला सिंह, उत्तम दास, नीलम आर्या, पुष्पा देवी, रेशमा, सुनीता देवी, चंदन सिंह मटियाली, हीरा देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

कार्यक्रम का संचालन किसान महासभा बागजाला की अध्यक्ष डॉ. उर्मिला रैसवाल ने किया।


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