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Fri. Oct 9th, 2026
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उत्तराखंड में पुरुष आयोग की मांग तेज, झूठे मामलों से पीड़ित पुरुषों को न्याय दिलाने की उठी आवाज

अल्मोड़ा।उत्तराखंड सहित देशभर में लंबे समय से पुरुष आयोग के गठन की मांग जोर पकड़ती जा रही है। वर्ष 2024 से विभिन्न सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार सोशल मीडिया, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर कर इस विषय को उठाया जा रहा है।

संगठनों का कहना है कि वर्तमान समय में दहेज और तलाक से जुड़े झूठे मामलों के कारण कई निर्दोष पुरुषों और पतियों को जेल जाना पड़ रहा है। ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या से अनेक परिवार मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। न्यायालयों के चक्कर काटते-काटते कई परिवार टूटने की कगार पर पहुंच गए हैं।

रीठागाड़ी दगड़ियो संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रताप सिंह नेगी ने महिलाओं द्वारा दर्ज कराए जा रहे झूठे दहेज और तलाक मामलों पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कानून का दुरुपयोग कर निर्दोष पुरुषों को फंसाया जा रहा है, जो न्याय व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है।

प्रताप सिंह नेगी ने पुरुष आयोग के लिए संघर्ष कर रहे सभी संगठनों का समर्थन करते हुए कहा कि उत्तराखंड देवभूमि में भी दहेज और तलाक से जुड़े मामलों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है, जिससे पुरुषों के अधिकारों की अनदेखी हो रही है।

अस्मिता संस्कृति संगठन, ऑल इंडिया मेन्स वेलफेयर एसोसिएशन, सेव इंडियन फैमिली फाउंडेशन सहित कई राष्ट्रीय संगठनों ने केंद्र सरकार से देश में पुरुष आयोग के गठन की मांग की है।

संगठनों ने देशवासियों से अपील की है कि वे अपने-अपने स्तर पर इस मांग का समर्थन करें, ताकि पीड़ित और निर्दोष पुरुषों को न्याय दिलाने के लिए जल्द से जल्द पुरुष आयोग का गठन हो सके।


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