धनंजय गिरी केस में बड़ा ट्विस्ट , हाईकोर्ट के आदेश पर ब्रेक — गिरफ्तारी पर लगी रोक
नैनीताल। धनंजय गिरी मामले में आज ऐसा न्यायिक घटनाक्रम सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी है। देश की सर्वोच्च अदालत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए धनंजय गिरी के खिलाफ किसी भी प्रकार की जबरन, दमनात्मक या उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद अब न तो जांच एजेंसियां धनंजय गिरी को गिरफ्तार कर सकती हैं और न ही उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दबावपूर्ण कार्रवाई की जा सकती है। अदालत का यह आदेश सीधे तौर पर प्रशासन और पुलिस के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है।
शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि पुलिस या प्रशासन ने किसी भी तरह की जल्दबाज़ी दिखाई या दबाव बनाने की कोशिश की, तो यह न्यायालय की अवमानना के दायरे में आएगा। इससे साफ है कि अब पूरा मामला न्यायिक निगरानी में रहेगा।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि आरोपों की जांच पर रोक नहीं है, लेकिन जांच केवल निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनसम्मत तरीके से ही की जाएगी। किसी भी तरह की मनमानी या पूर्वाग्रहपूर्ण कार्रवाई बर्दाश्त नहीं होगी।
गौरतलब है कि इससे पहले कुमाऊँ परिक्षेत्र में धनंजय गिरी के खिलाफ कथित फर्जीवाड़े को लेकर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की चर्चाएं तेज थीं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने पूरे मामले की दिशा बदल दी है और इसे पूरी तरह कानूनी चौखटे में सीमित कर दिया है।
सर्वोच्च अदालत के आदेश के बाद यह भी साफ हो गया है कि धनंजय गिरी दोषी हैं या निर्दोष, इसका फैसला केवल अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगा, न कि प्रशासनिक दबाव या सार्वजनिक बयानबाजी से।
अदालत ने धनंजय गिरी को जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश भी दिया है, जिससे यह साफ है कि मामला अभी खुला है, लेकिन कानून से ऊपर कोई नहीं — चाहे वह आरोपी हो या जांच एजेंसी।

