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हल्द्वानी में SIR के खिलाफ बड़ा आंदोलन तैयार, कई संगठनों ने भरी हुंकार

हल्द्वानी। जालियावाला बाग हत्याकांड की पूर्व संध्या पर 12 अप्रैल 2026 को क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन द्वारा हल्द्वानी में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर एक सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत जालियावाला बाग के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट के मौन से हुई। इसके बाद “ज़माने को बदलना है” जनगीत के साथ सेमिनार का औपचारिक शुभारंभ किया गया।

सेमिनार में संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष पी.पी. आर्या ने SIR की प्रक्रिया और इसके प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला। ठेका मजदूर कल्याण समिति के अभिलाख ने कहा कि देश में मजदूरों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है और उन्हें अपने दस्तावेजों की सुरक्षा और रोज़ी-रोटी के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर मजदूरों को अधिकारों से वंचित करने की कोशिश की जा रही है।

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उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अमीनू रहमान ने कहा कि SIR के जरिए मेहनतकश जनता को उनके जनवादी अधिकारों से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है। परिवर्तनकामी छात्र संगठन के उमेश पांडेय ने SIR प्रक्रिया में फर्जीवाड़े की आशंका जताते हुए असम के NRC और बिहार चुनाव का उदाहरण दिया।

वरिष्ठ पत्रकार व संस्कृतिकर्मी उमेश तिवारी (विश्वास) ने कहा कि वर्तमान समय में समाज व्यापक संकट से गुजर रहा है, ऐसे में एकजुट होकर बेहतर समाज के निर्माण के लिए आगे आना होगा। इंकलाबी मजदूर केंद्र के पूर्व अध्यक्ष कैलाश भट्ट ने कहा कि आपदाओं और रोजगार की तलाश में विस्थापन के कारण कई लोगों के दस्तावेज नष्ट हो चुके हैं, जिससे वे SIR के तहत प्रभावित हो सकते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता तसलीम अंसारी ने सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि लोगों को रोजगार और आवास से वंचित किया जा रहा है। प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की अध्यक्ष बिंदु गुप्ता ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और कहा कि यदि लोगों को डिटेंशन कैंप में रखा जाता है तो वहां महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ा सवाल होगा।

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उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी ने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर राजनीतिक विरोधियों के वोट हटाने और अल्पसंख्यकों को अधिकारों से वंचित करने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने इसके खिलाफ संयुक्त आंदोलन की आवश्यकता पर जोर दिया।

सेमिनार में क्रांतिकारी किसान मंच के आनंद पांडेय, महेश, पंकज, शिवदेव सिंह, रोहित रोहिला, राजेश सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में टी.आर. पांडेय, रियासत, चंद्रशेखर, भुवन कोहली, मीना, रजनी जोशी, तुलसी, देवकी, जानकी पांडेय, चितरंजन, टीकू सिंह, एन.एस. शर्मा, जयदेव, पवन कुमार, चंदन, अनिशेख, पुष्पा जलाल, हेमा, कमला सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

सेमिनार में पारित प्रस्ताव

सेमिनार में दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए—

1. SIR को निरस्त करने की मांग:
वक्ताओं ने कहा कि मतदाता शुद्धिकरण के नाम पर SIR प्रक्रिया नागरिकता परीक्षण की दिशा में कदम है, जिससे लोगों के मताधिकार पर खतरा उत्पन्न हो रहा है। प्रस्ताव में मांग की गई कि वोटर आईडी और आधार कार्ड को नागरिकता का आधार माना जाए तथा मतदाता बनने के लिए शपथपत्र और स्वघोषणा की पुरानी प्रक्रिया को जारी रखा जाए।

2. बनभूलपुरा बस्ती को उजाड़ने का विरोध:
दूसरे प्रस्ताव में हल्द्वानी की पुरानी बस्ती बनभूलपुरा को उजाड़ने की कार्रवाई का विरोध किया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि विभिन्न बहानों से मजदूरों की बस्तियों को हटाने की कोशिश की जा रही है। सेमिनार ने प्रभावित परिवारों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए उनके आवास की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

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