देहरादून प्रेमनगर कोतवाली पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर दर्ज किया पारिवारिक विवाद का मुकदमा
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देहरादून: पत्नी और ससुर ने सार्वजनिक की पीड़ित की ‘गंभीर बीमारी’, बंद करना पड़ा रेस्टोरेंट; कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज! 👇

देहरादून (प्रेमनगर): उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के प्रेमनगर थाना क्षेत्र से पारिवारिक कलह, गंभीर बीमारी को सार्वजनिक करने और धोखाधड़ी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और ससुर पर उसकी अत्यंत संवेदनशील बीमारी (एचआईवी पॉजिटिव) को समाज में सार्वजनिक कर उसका रोजगार बंद करवाने और जमीन के कीमती  दस्तावेज चोरी करने का गंभीर आरोप लगाया है। पुलिस द्वारा प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई न किए जाने के बाद, पीड़ित ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। अब कोर्ट के सख्त आदेश पर प्रेमनगर कोतवाली पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले की विधिक जांच शुरू कर दी है।

दहेज के झूठे आरोप और अलग रहने की शर्त से शुरू हुआ विवाद

अदालत में दाखिल की गई रिपोर्ट और पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार, पीड़ित व्यक्ति का विवाह वर्ष 2019 में हुआ था। विवाह के बाद उनके दो बच्चे भी हुए। पीड़ित का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही उसकी पत्नी ने परिवार पर दहेज उत्पीड़न का झूठा आरोप लगाना शुरू कर दिया और अपने मायके चली गई।

काफी मान-मनौव्वल और पत्नी से वापस लौटने का अनुरोध करने पर उसने एक शर्त रखी कि वह अपने माता-पिता और परिवार से अलग रहेगा। पत्नी की जिद के आगे झुकते हुए पीड़ित ने वर्ष 2020 में सुद्धोवाला क्षेत्र में एक किराये का अपार्टमेंट लिया, जहां वे दोनों वर्ष 2022 तक साथ रहे। हालांकि, इसके बाद वह फिर से पीड़ित के माता-पिता पर परेशान करने का आरोप लगाते हुए अपने मायके लौट गई। पीड़ित ने अपनी शिकायत में पत्नी पर झाझरा क्षेत्र के दो युवकों के साथ संदिग्ध संबंध होने और अनैतिक गतिविधियों में संलिप्त रहने के भी गंभीर आरोप लगाए हैं।

मार्च 2024 में बीमारी का पता चला, नवंबर में रोजगार पर किया वार

मामले में सबसे दुखद और संवेदनशील मोड़ तब आया, जब मार्च 2024 के दौरान पीड़ित की तबीयत अचानक अत्यधिक खराब हो गई। जब उसने देहरादून के एक चिकित्सालय में अपनी संपूर्ण स्वास्थ्य जांच कराई, तो रिपोर्ट में उसके एचआईवी पॉजिटिव (HIV Positive) होने की पुष्टि हुई। इस गंभीर बीमारी की चपेट में आने के बाद पीड़ित मानसिक और शारीरिक रूप से टूट चुका था।

अपनी आजीविका चलाने के लिए पीड़ित ने नवंबर 2024 में एक फास्ट-फूड रेस्टोरेंट खोला। आरोप है कि जब इसकी भनक उसकी पत्नी और ससुराल पक्ष (सस्वजन) को लगी, तो उन्होंने पीड़ित को आर्थिक रूप से तबाह करने की साजिश रची। आरोपितों ने रेस्टोरेंट में आने वाले नियमित ग्राहकों और स्थानीय लोगों के बीच पीड़ित की इस गंभीर बीमारी को जानबूझकर सार्वजनिक कर दिया। समाज में बीमारी की बात फैलते ही ग्राहकों ने वहां आना बंद कर दिया, जिसके कारण पीड़ित को भारी आर्थिक नुकसान झेलते हुए अपना रेस्टोरेंट बंद करने पर मजबूर होना पड़ा।

तलाक के बदले ₹20 लाख की डिमांड, जमीन के रसीदी दस्तावेज भी चुराए

पीड़ित का आरोप है कि जब उसने इन परिस्थितियों से तंग आकर पत्नी से आपसी सहमति से तलाक (Divorce) की बात कही, तो आरोपित पत्नी और ससुर ने उससे ₹20 लाख की भारी-भरकम रकम की डिमांड की। इसके साथ ही पीड़ित ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी और ससुर ने उसके घर से संपत्ति का रजिस्टर्ड सेल डीड (जमीन के मूल दस्तावेज) भी चोरी कर लिया था, जो कि अभी भी अवैध रूप से आरोपितों के कब्जे में है और वे इसे वापस नहीं कर रहे हैं।

पीड़ित का कहना है कि उसने पूर्व में इस संबंध में स्थानीय पुलिस को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस स्तर से कोई प्रभावी विधिक कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद पीड़ित ने न्याय के लिए माननीय न्यायालय की शरण ली। कोर्ट के हस्तक्षेप और आदेश के बाद अब प्रेमनगर कोतवाली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित विधिक धाराओं में आपराधिक मुकदमा पंजीकृत कर लिया है और मामले के सभी तकनीकी व मेडिकल साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है।


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