कोर्ट का बड़ा फैसला
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₹10 लाख के इंश्योरेंस क्लेम पर बड़ा फैसला!,अधिवक्ता अधिवक्ता सुनीता भट्ट की पैरवी रंग लाई

हल्द्वानी/नैनीताल: समान नागरिक संहिता (UCC) उत्तराखण्ड, 2024 के लागू होने के बाद नैनीताल जिला न्यायालय से एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक विधिक फैसले की विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट सामने आई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री प्रशान्त जोशी (H.J.S.) की अदालत ने उत्तराधिकार वाद संख्या-16 सन् 2026 (CNR No. UKNA01-000108-2026) पर गहन विधिक सुनवाई करते हुए परिवादिता के पक्ष में ₹10,00,000/- (दस लाख रुपये) की ग्रुप डेथ इंश्योरेंस क्लेम की धनराशि प्राप्त करने हेतु उत्तरजीवी (उत्तराधिकार) प्रमाण पत्र जारी करने का अंतिम आदेश पारित कर दिया है। न्यायालय का यह विधिक आदेश 17 जुलाई 2026 को खुले न्यायालय में उद्घोषित किया गया, जिसने पीड़ित परिवार को उनका कानूनी हक दिलाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।

इस संवेदनशील और जटिल उत्तराधिकार वाद में परिवादिता की ओर से महिला अधिवक्ता सुनीता भट्ट ने पटल पर प्रभावी पैरवी की और सभी विधिक साक्ष्यों को मजबूती से प्रस्तुत किया।

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दुर्घटना में असमयिक मृत्यु और ₹10 लाख के इंश्योरेंस क्लेम का विधिक पेंच

इस वाद की पृष्ठभूमि अत्यंत दुखद है। परिवादिता के पति सिडकुल पंतनगर (जनपद ऊधम सिंह नगर) स्थित प्रतिष्ठित कंपनी में कार्यरत थे। बीते 06 मई 2025 को काठगोदाम (जिला नैनीताल) के अंतर्गत एक भीषण सड़क दुर्घटना में उनका आकस्मिक और दर्दनाक निधन हो गया था। मृतक के निधन के बाद कंपनी द्वारा उनका ₹10 लाख का ग्रुप डेथ इंश्योरेंस क्लेम स्वीकृत किया गया था ।

इस स्वीकृत धनराशि को प्राप्त करने के लिए इंश्योरेंस कंपनी के नियमानुसार न्यायालय द्वारा जारी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की अत्यंत आवश्यकता थी, जिसके लिए परिवादिता द्वारा 02 फरवरी 2026 को न्यायालय में विधिक वाद संस्थित किया गया था।

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न्यायालय की सघन विधिक प्रक्रिया और साक्ष्यों का परीक्षण

प्रार्थना पत्र संस्थित होने के बाद जिला न्यायालय द्वारा नियमानुसार प्रतिपक्षियों को विधिक नोटिस जारी किए गए थे तथा आम जनता (हर आम व खास) की जानकारी हेतु 07 फरवरी 2026 को समाचार पत्र में इसका विधिक प्रकाशन भी कराया गया था।

  • विपक्ष की अनापत्ति: नोटिस के जवाब में विपक्षी संख्या 1 लगायत 3 द्वारा न्यायालय के पटल पर अपना विधिक जवाबदावा (कागज संख्या 19ग/1, 19ग/3 व 19ग/5) दाखिल किया गया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि परिवादिता के पक्ष में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करने में उन्हें किसी भी प्रकार की कोई विधिक आपत्ति नहीं है।

  • दस्तावेजी साक्ष्य: परिवादिता की ओर से अपनी विधिक सत्यता सिद्ध करने के लिए न्यायालय में वकालतनामा, आधार कार्ड की छायाप्रति, आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र, ब्रिटानिया कंपनी द्वारा जारी अनुरोध पत्र की छायाप्रति, पर्सनल एक्सीडेंट क्लेम फॉर्म तथा पूर्व में जारी उत्तरजीवी प्रमाण पत्र की विधिक प्रतियों सहित कई दस्तावेजी साक्ष्य (कागज संख्या 6ग से 12ग) दाखिल किए गए थे।

  • मौखिक साक्ष्य: परिवादिता ने स्वयं को बतौर मुख्य गवाह (P.W.-1) न्यायालय के समक्ष परीक्षित कराया और अपने मौखिक बयानों से वाद के तथ्यों की विधिक पुष्टि की।

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15 जुलाई 2026 को दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की अंतिम विधिक बहस सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का गहनता से परिशीलन करने के बाद जिला न्यायाधीश श्री प्रशान्त जोशी ने अपना निर्णय सुरक्षित किया था, जिसे 17 जुलाई 2026 को जारी किया गया।

माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि चूंकि इस दावे पर न तो विपक्षियों को कोई आपत्ति है और न ही अखबार में प्रकाशन के बावजूद किसी अन्य बाहरी व्यक्ति ने कोई विधिक चुनौती पेश की है, अतः परिवादिता का यह प्रार्थना पत्र स्वीकार किए जाने योग्य है। न्यायालय ने आदेश दिया कि नियमानुसार आवश्यक विधिक न्यायशुल्क (Court Fee) अदा करने के उपरांत परिवादिता के पक्ष में ₹10 लाख की क्लेम राशि प्राप्त करने हेतु उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी किया जाए। इस फैसले के बाद पत्रावली को विधिक नियमानुसार अभिलेखागार प्रेषित कर दिया गया है।

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