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देवभूमि जन हुंकार, हल्द्वानी (नैनीताल): उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर में रामलीला मैदान के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक घमासान अब पूरी तरह से कानूनी मोर्चे पर पहुंच गया है। इस बहुचर्चित मामले में पुलिस ने कड़ा कदम उठाते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। शिकायतकर्ताओं ने उन पर अनुसूचित जाति के खिलाफ कथित तौर पर जातिसूचक और आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल का गंभीर आरोप लगाया है।

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प्राप्त विवरण के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा से जुड़ा हुआ है। खड़गे की सभा के बाद मैदान में हुए कथित ‘शुद्धिकरण कार्यक्रम’ को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में लंबी और तीखी बयानबाजी का दौर चला था, जिसने दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा दिया था।

इसी बीच, उस शुद्धिकरण कार्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से शामिल रहे विनोद आर्य और अमित कुमार की ओर से स्थानीय पुलिस को एक औपचारिक तहरीर दी गई। दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा इस पूरे घटनाक्रम पर दिए गए बयानों व प्रतिक्रियाओं में अनुसूचित जाति के खिलाफ कथित तौर पर जातिसूचक और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे भावनाओं को ठेस पहुंची है।

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एससी/एसटी एक्ट और बीएनएस की इन धाराओं में हुआ केस दर्ज

पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कानूनी विशेषज्ञों से सलाह मशविरा किया। अमित कुमार की तहरीर के आधार पर पुलिस ने एफआईआर संख्या 297/2026 दर्ज कर ली है।

उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस मामले में पुलिस ने निम्नलिखित गंभीर धाराएं लगाई हैं:

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना आदि)

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 (किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से किया गया दुर्भावनापूर्ण कृत्य)

  • अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(q)

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एफआईआर दर्ज होने के बाद रामलीला मैदान शुद्धिकरण विवाद ने एक नया और बड़ा राजनीतिक तथा कानूनी मोड़ ले लिया है। इस हाई-प्रोफाइल मुकदमे के बाद से राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी और तेज हो गई है।

हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, लेकिन लगाए गए आरोपों की वास्तविक और तथ्यात्मक स्थिति पुलिस विवेचना (Investigation) और साक्ष्यों की गहन पड़ताल के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, पुलिस की आगामी कार्रवाई और इस मामले में होने वाली विवेचना पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।


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