
देवभूमि जन हुंकार, बनबसा / चम्पावत: भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाली और हाई-वोल्टेज ड्रामे की खबर सामने आ रही है। पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के एक आरोपी की गिरफ्तारी के लिए नेपाल पहुँची कर्नाटक पुलिस की टीम को स्थानीय ग्रामीणों ने बंधक बना लिया। बिना स्थानीय पुलिस को आधिकारिक रूप से सूचित किए और बिना वैध वारंट के की गई इस कार्रवाई के बाद नेपाल में भारी हंगामा मच गया। अंततः नेपाल पुलिस के अधिकारियों के हस्तक्षेप और मध्यस्थता के बाद शाम को पुलिसकर्मियों को छोड़ा गया, जिसके बाद वे बैरंग वापस लौट आए।
प्राप्त विवरण के अनुसार, कुछ महीने पहले कर्नाटक राज्य में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म का गंभीर मामला प्रकाश में आया था। इस मामले में अभियोग पंजीकृत होने के बाद से कर्नाटक पुलिस लगातार मुख्य आरोपी की तलाश में जुटी हुई थी और उसकी गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग राज्यों व ठिकानों पर दबिश दे रही थी।
जांच के दौरान सूत्रों से कर्नाटक पुलिस को इनपुट मिला कि आरोपी की लोकेशन नेपाल में है। इसी सूचना के आधार पर शनिवार को कर्नाटक पुलिस के एक एएसआई सहित दो पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के बनबसा बार्डर से होते हुए नेपाल के कंचनपुर जिले के दोराहे क्षेत्र में जा पहुँचे।
नेपाल के उक्त गांव में जब कर्नाटक पुलिस ने स्थानीय सहयोग के बिना ही आरोपी को पकड़ने के लिए धरपकड़ शुरू की, तो वहां का माहौल अचानक गर्मा गया। बाहरी पुलिसकर्मियों को इस तरह कार्रवाई करते देख स्थानीय लोग भड़क गए।
देखते ही देखते भारी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए और उन्होंने कर्नाटक पुलिस की टीम को चारों तरफ से घेर लिया तथा उन्हें बंधक बना लिया। ग्रामीणों के कड़े तेवर देख पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय नेपाल पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुँची। नेपाल पुलिस ने जब कर्नाटक पुलिस से पूछताछ की और आरोपी का गिरफ्तारी वारंट तथा नेपाल में कार्रवाई करने संबंधी वैध दस्तावेज दिखाने को कहा, तो वे कुछ भी पेश करने में असमर्थ रहे।
इसके साथ ही यह बात भी खुलकर सामने आई कि इस सीमा पार दबिश से पहले कर्नाटक पुलिस ने नेपाल की स्थानीय प्रशासन या पुलिस को न तो कोई पूर्व सूचना दी थी और न ही उनसे किसी प्रकार का विधिक सहयोग लिया था।
सुबह के वक्त नेपाल पहुँचे इन पुलिसकर्मियों और आक्रोशित ग्रामीणों के बीच घंटों तक तीखी नोंकझोंक और खींचतान चलती रही। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए नेपाल पुलिस के उच्चाधिकारियों ने बीच-बचाव किया और दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की।
अंततः नेपाल पुलिस के हस्तक्षेप के बाद शाम को ग्रामीणों ने कर्नाटक पुलिस की टीम को मुक्त किया। इसके बाद बिना अपनी कार्रवाई में सफल हुए वे बैरंग वापस लौट आए। बनबसा थाना प्रभारी ने मीडिया को जानकारी दी कि मामले की सूचना मिलने के बाद नेपाल में रोकी गई टीम को बाद में छोड़ दिया गया था। अंतरराष्ट्रीय बार्डर पर इस तरह बिना समन्वय के पुलिस कार्रवाई करने का यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है।
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