देवभूमि जन हुंकार, देहरादून / हल्द्वानी: उत्तराखंड के स्वास्थ्य महकमे में रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करने वाली आशा वर्करों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल बजा दिया है। उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन (संबद्ध: ऐक्टू / AICCTU) के आह्वान पर राज्य की आशाओं ने मुख्यमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन प्रेषित करते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो वे राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन आंदोलन के लिए बाध्य होंगी।
सितंबर के हर मंगलवार को स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रदर्शन
यूनियन के कार्यक्रम के अनुसार, आशाओं को न्यूनतम वेतन, पेंशन, नियमितीकरण और अन्य गंभीर मुद्दों को लेकर सितंबर माह की 1 तारीख से सितंबर महीने के हर मंगलवार को प्रदेशभर में प्रदर्शन किए जा रहे हैं। सीएससी सेंटर्स, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और राजकीय चिकित्सालयों में तैनात आशा कार्यकर्ता धरना-प्रदर्शन के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं। यूनियन का स्पष्ट कहना है कि यदि इसके बाद भी समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा।
“श्रम का हो रहा है शोषण, विधायकों के बढ़ रहे वेतन”
ज्ञापन में तीखा प्रहार करते हुए कहा गया है कि सरकार आशाओं के श्रम का लगातार शोषण कर रही है। उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आशाओं को न तो न्यूनतम वेतन मिलता है और न ही किसी प्रकार का कर्मचारी का दर्जा दिया जाता है, जो कि पूरी तरह अनुचित और अन्यायपूर्ण है।
यूनियन ने रोष जताते हुए कहा कि एक तरफ सरकार लगातार विधायकों के वेतन और भत्ते बढ़ाती जा रही है, वहीं दूसरी तरफ मातृ-शिशु सुरक्षा से लेकर स्वास्थ्य विभाग के हर अभियान को जमीन पर उतारने वाली आशा वर्कर्स को दैनिक मजदूरों से भी कम पैसा मिल रहा है, जो बेहद शर्मनाक है।
खटीमा में पांच साल पहले दिए गए वादे की दिलाई याद
यूनियन ने मुख्यमंत्री को उनके पुराने वादे की याद दिलाते हुए कहा कि 31 अगस्त 2021 को ऐक्टू के नेतृत्व में चले आंदोलन के बाद खटीमा स्थित कैंप कार्यालय में आशाओं के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने डीजी हेल्थ उत्तराखंड के प्रस्ताव को लागू करते हुए प्रतिमाह 11,500 रुपये मानदेय नियत करने का वादा किया था। उस वादे को पूरे पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन सरकार द्वारा आज तक वह वादा पूरा नहीं किया गया है।
यूनियन की प्रमुख 10 सूत्रीय मांगें
उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने मुख्यमंत्री के समक्ष निम्नलिखित 10 प्रमुख मांगें रखी हैं:
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खटीमा में किए गए वादे के अनुसार 2021 के डीजी हेल्थ के प्रस्ताव को लागू कर आशाओं का मानदेय तत्काल 11,500 रुपये किया जाए।
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आशाओं को न्यूनतम वेतन, स्थायी कर्मचारी का दर्जा तथा सेवानिवृत्ति पर अनिवार्य पेंशन का प्रस्ताव आगामी विधानसभा सत्र में पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाए।
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जब तक मासिक पेंशन का प्रावधान नहीं होता, तब तक राज्य सरकार रिटायरमेंट के समय 10 लाख रुपये की एकमुश्त धनराशि देने की घोषणा करे।
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विभिन्न मदों के लिए मिलने वाले पैसों को कई-कई महीनों तक लटकाने के बजाय हर महीने अनिवार्य रूप से भुगतान किया जाए।
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ट्रेनिंग और पल्स पोलियो अभियान के दौरान प्रतिदिन 500 रुपये का भुगतान किया जाए।
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सभी सरकारी अस्पतालों को आशाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने के कड़े निर्देश दिए जाएं।
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राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के खाली पदों को तत्काल भरा जाए।
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प्रदेश के सभी अस्पतालों में ‘आशा घर’ का निर्माण किया जाए।
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नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) का बजट बढ़ाया जाए और उसमें एनजीओ की भूमिका खत्म कर सभी कार्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराए जाएं।
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मनमाने बहाने बनाकर आशाओं की छंटनी करने की कोशिशों पर तुरंत रोक लगाई जाए।
यूनियन ने अंत में उम्मीद जताई है कि सरकार इन मांगों पर संज्ञान लेते हुए तत्काल समाधान की प्रक्रिया शुरू करेगी। साथ ही दो-टूक चेतावनी दी गई है कि यदि विधानसभा चुनाव से पूर्व समयबद्ध तरीके से आशाओं की मांगें पूरी नहीं हुईं, तो राज्य सरकार की बेरुखी के खिलाफ राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।




