National Education Concept Representing TET Framework Review For In-Service Teachers By Education Ministry
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देवभूमि जन हुंकार, नई दिल्ली / देहरादून: देश भर के विभिन्न राज्यों के विद्यालयों में वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे लाखों सेवाकालीन (कार्यरत) शिक्षकों के लिए एक बहुत ही बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं, विसंगतियों और कानूनी अनिश्चितताओं को सुलझाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। 16 सितंबर को जारी एक आधिकारिक कार्यालय ज्ञापन के मुताबिक, केंद्र सरकार ने सेवाकालीन शिक्षकों के लिए TET ढांचे की व्यापक प्रशासनिक और विधायी समीक्षा करने का निर्णय लिया है।

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देश भर के कई राज्यों में लंबे समय से पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए TET पास करने की अनिवार्यता एक गंभीर और बड़ा मुद्दा बनी हुई थी। परीक्षाओं के अनियमित आयोजन, प्रशासनिक देरी और अचानक आए कानूनी बदलावों के कारण कार्यरत शिक्षकों के सामने उनके पदों, वेतन और सेवा निरंतरता को लेकर भारी अनिश्चितताएं पैदा हो रही थीं।

केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई इस व्यापक समीक्षा और RTE अधिनियम (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) में संभावित संशोधन के विचार से देश भर के लाखों शिक्षकों को एक बड़ी राहत और स्पष्टता मिलने की उम्मीद बंध गई है। केंद्र का यह मुख्य उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के हालिया निर्देशों के बाद कार्यरत शिक्षकों के समक्ष उत्पन्न व्यावहारिक चुनौतियों का पूरी तरह सहानुभूतिपूर्वक और कानून सम्मत समाधान निकालना है।

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शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने सभी सेवाकालीन शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके बाद विभिन्न राज्यों में कार्यरत शिक्षकों की ओर से व्यावहारिक और संरचनात्मक कठिनाइयों को रेखांकित करते हुए कई रिप्रजेंटेशन (ज्ञापन) प्राप्त हुए थे।

अदालत के 1 सितंबर 2025 के फैसले और उसके बाद 29 मई 2026 को दिए गए आदेश के तहत शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक का समय प्रदान किया गया है। केंद्र सरकार का मानना है कि इस निर्धारित अवधि के दौरान एक ऐसा संक्रमणकालीन ढांचा तैयार किया जाए, जो कानूनी रूप से पूरी तरह टिकाऊ हो और साथ ही देश के शिक्षकों के करियर व भविष्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न डाले।

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इस व्यापक समीक्षा प्रक्रिया के तहत शिक्षा मंत्रालय ने निम्नलिखित 5 प्रमुख बिंदुओं को निर्धारित किया है:

  1. योग्यता मानदंडों की जांच: मौजूदा TET योग्यता मानदंडों की बारीकी से जांच की जाएगी ताकि शिक्षा के गुणवत्तापूर्ण मानकों को बनाए रखते हुए शिक्षकों के करियर की निरंतरता बनी रहे।

  2. व्यावहारिक रणनीतियां: वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों के लिए ऐसी व्यावहारिक रणनीतियां तैयार की जाएंगी, जिससे उन्हें नए कानूनी नियमों का पालन करने में न्यूनतम व्यवधान का सामना करना पड़े।

  3. नियमित परीक्षाओं का आयोजन: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश दिया जाएगा कि वे समय पर और नियमित रूप से TET परीक्षाएं (द्विवार्षिक या तय समय सीमा के भीतर) आयोजित करने के लिए अपने बुनियादी ढांचे में सुधार करें।

  4. व्यापक विचार-विमर्श: सर्वसम्मति बनाने के लिए राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) और देश के शिक्षा विशेषज्ञों के साथ मिलकर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।

  5. कानूनी संशोधन: इस बदलाव को आसान बनाने के लिए प्रासंगिक कानूनी ढांचे, जैसे RTE Act, में संभावित संशोधनों की तकनीकी और कानूनी व्यवहार्यता का पता लगाया जाएगा।

मंत्रालय ने सभी संबंधित राज्य शैक्षणिक प्राधिकरणों और नोडल एजेंसियों से आग्रह किया है कि वे इस ज्ञापन के जारी होने की तिथि (16 सितंबर 2026) से 30 दिनों के भीतर अपनी क्षेत्रीय चुनौतियों और आंकड़ों पर आधारित ठोस सुझाव केंद्र सरकार को प्रेषित करें।


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