Uttarakhand Mass Protest Concept Representing Bindukhata Revenue Village Demand In Lalkuan
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देवभूमि जन हुंकार, लालकुआं / बिंदुखत्ता / नैनीताल: उत्तराखंड के तटीय और तराई क्षेत्र के बहुचर्चित मुद्दे ‘बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा’ दिए जाने की वर्षों पुरानी मांग रविवार को एक बार फिर भीषण रूप से सड़कों पर उतर आई। वनाधिकार संगठन के आह्वान पर बिंदुखत्ता के कोने-कोने से उमड़े दस हजार से अधिक ग्रामीणों ने लालकुआं शहर में एक ऐतिहासिक और विशाल रैली निकालकर शासन-प्रशासन के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी। हजारों की संख्या में पहुंचे आंदोलनकारियों के प्रदर्शन से पूरे लालकुआं क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।

जनता इंटर कॉलेज से शुरू होकर तहसील तक पहुंचा जनसैलाब

रविवार की सुबह से ही बिंदुखत्ता के विभिन्न क्षेत्रों से ग्रामीणों का लालकुआं पहुंचना शुरू हो गया था। जनता इंटर कॉलेज, जड़ सेक्टर से शुरू हुई यह विशाल रैली लालकुआं मुख्य बाजार से होते हुए सीधे तहसील परिसर तक पहुँची। रैली में उमड़ी भारी भीड़ ने इस आंदोलन की ताकत का एक बड़ा संदेश शासन तक पहुँचा दिया है।

संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, सुबह करीब 11 बजे तक छह हजार से अधिक ग्रामीण एकत्र हो चुके थे, और दोपहर तक यह संख्या बढ़कर दस हजार के आंकड़े को पार कर गई। तहसील पहुंचने के बाद आयोजित धरना-प्रदर्शन के माध्यम से ग्रामीणों ने वर्षों से लंबित पड़ी अपनी मांगों पर तत्काल कार्रवाई करने की जोरदार मांग उठाई।

राजस्व ग्राम के साथ गौला नदी पर स्थायी तटबंध की भी मांग

रैली और प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने मुख्य रूप से दो सूत्रीय मांगों पर जोर दिया:

  1. राजस्व ग्राम की अधिसूचना: बिंदुखत्ता क्षेत्र को विधिवत रूप से राजस्व ग्राम घोषित करते हुए उसकी शासकीय अधिसूचना तत्काल जारी की जाए।

  2. गौला नदी पर तटबंध: क्षेत्र की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गौला नदी के किनारे स्थायी तटबंध का निर्माण कराया जाए, ताकि बाढ़ और कटाव से बस्तियों को बचाया जा सके।

क्या है वनाधिकार कानून और 2024 के प्रस्ताव का मामला?

वनाधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट ने मीडिया और जनता को संबोधित करते हुए पूरी पृष्ठभूमि स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि बिंदुखत्ता के 32 गांवों के 11,703 दावेदारों की ओर से वनाधिकार कानून-2006 की धारा 3(1)(ज) के तहत प्रस्तुत किए गए सामुदायिक दावे को 19 जून 2024 को जिला स्तरीय वन अधिकार समिति ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया था।

इसके बाद राजस्व ग्राम की आधिकारिक अधिसूचना और बंदोबस्ती (Settlement) की प्रक्रिया शुरू करने के लिए विधिवत प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। लेकिन विडंबना यह है कि इतने महीने बीत जाने के बाद भी शासन स्तर से अब तक अधिसूचना जारी नहीं की जा सकी है।

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पदयात्रा से लेकर महाआंदोलन तक का सफर

अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट के अनुसार, राजस्व ग्राम का दर्जा बिंदुखत्ता के आम नागरिकों की लंबे समय से चली आ रही जीवन-मरण की मांग है। इस मांग के लिए ग्रामीण लगातार अधिकारियों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपते रहे हैं।

मांग को धार देने के लिए बीते 15 अगस्त से पदयात्रा के जरिए गांव-गांव जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में रविवार को यह विशाल रैली आयोजित कर सरकार और शासन का ध्यान इस लंबित मांग की ओर खींचा गया है।

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 “जब तक अधिसूचना नहीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा”

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से केवल झूठे आश्वासन और प्रस्तावों की कागजी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अंतिम अधिसूचना का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। शासन की इसी उदासीनता से नाराज आंदोलनकारियों ने दो-टूक शब्दों में साफ कर दिया है कि जब तक राजस्व ग्राम की आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक उनका यह आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।

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बिंदुखत्ता से इतनी बड़ी संख्या में ग्रामीणों के अचानक लालकुआं पहुंचने की संभावना को भांपते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े और व्यापक इंतजाम किए थे। लालकुआं बाजार से लेकर तहसील परिसर तक चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। इसके अलावा संवेदनशील स्थानों पर भी पुलिस की मौजूदगी को बढ़ाया गया था, ताकि इस विशाल रैली और धरना-प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में बनी रहे।

रविवार को लालकुआं की सड़कों पर उमड़े इस जनसैलाब ने यह साबित कर दिया है कि बिंदुखत्ता का राजस्व ग्राम का मुद्दा अब केवल कागजी ज्ञापनों और आश्वासनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह हजारों ग्रामीणों के एक विशाल जनआंदोलन का रूप ले चुका है।

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