देवभूमि जन हुंकार, वृंदावन / मथुरा / देहरादून: उत्तर प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध धार्मिक और आध्यात्मिक नगर वृंदावन से एक अत्यंत रहस्यमयी, झकझोर देने वाली और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। वराह घाट मार्ग पर स्थित ‘गऊ कृपा कुंज’ आश्रम की छत से कूदकर संत प्रेमानंद महाराज के एक साधक (परिकर) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय पुलिस प्रशासन बल्कि पूरे संत समाज को हिलाकर रख दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मृतक साधक का प्राइवेट पार्ट कटा हुआ था और उनके शरीर व कपड़ों पर खून के गहरे निशान पाए गए हैं, जिसके बाद संतों ने हत्या की आशंका जताते हुए सीबीआई जांच (CBI Probe) की पुरजोर मांग उठाई है।
चार मंजिला गऊ कृपा कुंज आश्रम में हुई घटना
पुलिस और स्थानीय सूत्रों से प्राप्त विवरण के अनुसार, वृंदावन के वराह घाट के पास गऊ कृपा कुंज के नाम से एक चार मंजिला आश्रम संचालित है। इस आश्रम में संत प्रेमानंद महाराज के करीब 40 से 50 साधक रहकर मां राधारानी की उपासना और साधना करते हैं।
बीते शुक्रवार की सुबह करीब 10:30 बजे इस आश्रम की चौथी मंजिल से एक साधक ने अचानक नीचे छलांग लगा दी। वह आश्रम से करीब छह फुट की दूरी पर सड़क पर आकर गिरे, जिससे उनके गिरते ही वहां भारी अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। आश्रम में रहने वाले अन्य साधक तुरंत गाड़ी से उन्हें लेकर अस्पताल भागे, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
प्राइवेट पार्ट कटा होने और खून से लथपथ मिलने से उलझा मामला
शुरुआती जांच में भले ही इसे आत्महत्या बताया जा रहा था, लेकिन जैसे ही पुलिस और डॉक्टरों ने शव की गहनता से पड़ताल की, कई खौफनाक और हैरान करने वाले तथ्य सामने आए।
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मृतक साधक की धोती कमर से नीचे पूरी तरह खून से लथपथ हो रही थी और उनके मुंह से भी खून निकल रहा था।
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जब चिकित्सकों और पुलिस ने स्थिति की जांच की, तो पाया कि उनका प्राइवेट पार्ट कटा हुआ था।
इस गंभीर और रहस्यमयी स्थिति ने इस पूरी घटना को आत्महत्या से बदलकर एक संगीन आपराधिक षड्यंत्र या गहरे असमंजस में डाल दिया है। मृतक की पहचान मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी 25 वर्षीय दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारीशरण के रूप में हुई है।
संत समाज में भारी रोष, हत्या की आशंका जताते हुए सीबीआई जांच की मांग
संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य की इस संदिग्ध मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। वृंदावन के साधु-संतों के बीच इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और गहरा आक्रोश व्याप्त है। कई संत संगठनों और महानुभावों ने इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग करते हुए इसे सीधे तौर पर हत्या (Murder) की आशंका से जोड़ा है।
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दिनेश फलाहारी महाराज (श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर-मस्जिद प्रकरण के याचिकाकर्ता) ने कड़ा बयान देते हुए कहा कि वृंदावन में देशभर से लाखों साधु-संत तपस्या के लिए आते हैं। यह भगवान श्रीकृष्ण की क्रीड़ा भूमि है और यहाँ इस तरह की घटना बेहद चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि साधु के शरीर पर चोट के निशान और प्राइवेट पार्ट कटे होने की बात सामने आई है, जो आत्महत्या की थ्योरी को खारिज करती है। उन्होंने इस पूरे मामले की सीबीआई (CBI) से जांच कराने की मांग की है।
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महामंडलेश्वर राधानंद गिरी ने भी स्पष्ट किया कि प्रेमानंद महाराज के शिष्य के साथ कोई बड़ी अनहोनी हुई है, और वास्तविकता सामने लाने के लिए सघन जांच होनी चाहिए।
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महंत पवन गिरी महाराज ने कहा कि प्रथम दृष्टया इसे आत्महत्या मानना बिल्कुल भी उचित नहीं है। साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर गंभीर रूप से विचार किया जाना चाहिए और उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।
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पुलिस प्रशासन और फोरेंसिक टीम की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी सिटी राजीव कुमार सिंह और सीओ वृंदावन संदीप सिंह भी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँच गए। पुलिस ने तत्काल प्रभाव से फोरेंसिक टीम (Forensic Team) को मौके पर बुलाया, जिसने आश्रम की चौथी मंजिल और घटनास्थल से तमाम साक्ष्य संकलित किए।
एसपी सिटी राजीव कुमार सिंह ने मीडिया को जानकारी दी कि साधक के शव को पोस्टमार्टम गृह भेज दिया गया है और विधिक प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत की असली वजह, परिस्थितियों और शरीर पर मिले जख्मों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। पुलिस हर एंगल से मामले की बारीकी से छानबीन कर रही है।
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