देवभूमि जन हुंकार, देहरादून / हल्द्वानी / नैनीताल: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से प्रशासनिक महकमे और आम नागरिकों को हिलाकर रख देने वाला एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रशासनिक प्रभाव, फर्जी सरकारी ओहदों और उच्चाधिकारियों के छद्म नामों का दुरुपयोग कर भोले-भाले नागरिकों को अपनी ठगी का शिकार बनाने वाले एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट (Fraud Syndicate) का पर्दाफाश हुआ है। राजधानी के नेहरू कॉलोनी थाने में दर्ज कराई गई गंभीर शिकायत के आधार पर, शातिर ठग प्रकाश मेहरा उर्फ प्रकाश नेगी और उसके सहयोगी अतुल घुड़त्याल के खिलाफ 12.38 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस बहुचर्चित आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास सामने आने से पुलिस भी हैरान है।
खुद को स्वास्थ्य महानिदेशक (DG Health) बताकर दिया झांसा
देहरादून निवासी चंदन सिंह रावत द्वारा नेहरू कॉलोनी थाने को सौंपी गई विस्तृत शिकायत के अनुसार, मुख्य साजिशकर्ता अतुल घुड़त्याल और हल्द्वानी के शातिर अपराधी प्रकाश मेहरा ने स्वास्थ्य महकमे में अपनी कथित गहरी और मजबूत पैठ का झूठा झांसा देकर पीड़ित का पूरा विश्वास अर्जित किया था।
आरोपियों ने अपने फर्जी प्रशासनिक प्रभाव का हवाला देते हुए प्रार्थी को सरकारी ठेका दिलाने, राज्य सचिवालय में काम आसानी से करवाने और टेंडर पास कराने का लालच दिया। इसके नाम पर उन्होंने कुल 12.38 लाख रुपये दो अलग-अलग किस्तों में ऐंठ लिए। इसमें से ₹6.50 लाख नकद तथा ₹5.88 लाख सीधे बैंक ट्रांसफर के माध्यम से प्राप्त किए गए थे। ठगी का शिकार होने के बाद जब पीड़ित को अहसास हुआ, तो आरोपियों ने महज़ ₹2 लाख वापस कर बाकी के ₹10.38 लाख डकार लिए।
बकाया मांगने पर मिलती थी जान से मारने की धमकियां
जब पीड़ित चंदन सिंह रावत ने अपनी बकाया धनराशि वापस करने का दबाव बनाया, तो आरोपियों की दबंगई सामने आ गई। शुरुआत में उन्हें “अभी सदन चल रहा है, हम बहुत व्यस्त हैं” जैसे बहाने बनाकर टाला जाता रहा।
लेकिन जब पीड़ित ने सख्ती दिखाई, तो आरोपियों द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकियाँ देने और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनियाँ दी जाने लगीं। इस लगातार मिल रही प्रताड़ना के बाद शिकायतकर्ता ने अपनी तथा अपने परिवार के सदस्यों की सुरक्षा पर गहरा संकट व्यक्त करते हुए पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई।
सह-आरोपी की फर्जी पहचान और प्रकाश मेहरा का काला चिट्ठा
इस पूरे प्रकरण में फर्जी पहचान और छद्म नामों के इस्तेमाल की परतें भी तेजी से खुल रही हैं। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि सह-आरोपी अतुल घुड़त्याल का वास्तविक नाम बहादुर सिंह है और वह मूल रूप से अल्मोड़ा जनपद का रहने वाला है। पीड़ित ने आरोपियों के वास्तविक पतों, छद्म पहचानों और उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि की गहन तकनीकी व विधिक जांच की मांग की है।
खास बात यह है कि मुख्य आरोपी प्रकाश मेहरा की आपराधिक संदिग्धता केवल देहरादून के इस हालिया प्रकरण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसका एक लंबा और दागदार इतिहास रहा है:
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हल्द्वानी गोलापार फर्जी डिग्री घोटाला: पूर्व में हल्द्वानी के गोलापार स्थित एक उच्च शिक्षण संस्थान में फर्जी डिग्री और कूटरचित दस्तावेजों के बहुचर्चित और सनसनीखेज मामले में यह मुख्य आरोपी सलाखों के पीछे जा चुका है।
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मरियम पैरामेडिकल कॉलेज अवैध कब्जा साजिश: इसके अतिरिक्त, हल्द्वानी के कमलुआगांजा स्थित मरियम पैरामेडिकल कॉलेज की बहुमूल्य संपत्तियों पर अवैध कब्जा जमाने की साजिश रचने और फर्जी अभिलेख तैयार करने के मामले में भी कॉलेज के संस्थापक पक्ष द्वारा प्रकाश मेहरा व उसके गिरोह के विरुद्ध वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (नैनीताल) को शिकायती पत्र सौंपा जा चुका है, जिसकी जांच वर्तमान में प्रचलित है।
हल्द्वानी का गोलापार फर्जी डिग्री प्रकरण, देहरादून में स्वास्थ्य महानिदेशक के नाम पर की गई यह भारी धोखाधड़ी, और हल्द्वानी के ही मरियम कॉलेज की परिसंपत्तियों पर कब्जे का षड्यंत्र—ये तमाम घटनाएं इस बात की ओर स्पष्ट संकेत करती हैं कि प्रकाश मेहरा एक शातिर और संगठित आपराधिक गिरोह का संचालन कर रहा है।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को संज्ञान में लेते हुए प्राथमिकी दर्ज कर ली है तथा बकाया राशि की बरामदगी और आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी के लिए विधिक प्रक्रिया तेज कर दी है। हालांकि, मुकदमा दर्ज होने के कई दिन बीत जाने के बावजूद दोनों शातिर अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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