देवभूमि जन हुंकार, देहरादून / नैनीताल / हल्द्वानी: उत्तराखंड के शैक्षणिक संस्थानों में छात्रसंघ चुनावों के दौरान हुए हंगामे और उसके बाद पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर अब सूबे की सियासत गरमा गई है। छात्रसंघ चुनाव की मतगणना के दौरान एबीवीपी (ABVP) कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज की घटना को लेकर मेयर गजराज सिंह बिष्ट ने मुखर होकर पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मेयर ने इस पुलिसिया कार्रवाई को पूरी तरह ‘अलोकतांत्रिक’ करार देते हुए पुलिस पर कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न का सीधा आरोप लगाया है।
कांग्रेस राज में भी ऐसा व्यवहार नहीं हुआ — मेयर गजराज सिंह बिष्ट
मेयर गजराज सिंह बिष्ट ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि छात्र संगठनों और कार्यकर्ताओं के साथ इस तरह का बर्ताव बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह का अलोकतांत्रिक व्यवहार कांग्रेस शासनकाल में भी कभी देखने को नहीं मिला था।
अपने बयान में उन्होंने उत्तराखंड की दिवंगत वरिष्ठ नेत्री और पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व. इंदिरा हृदयेश का विशेष रूप से उदाहरण दिया। मेयर ने कहा कि वैचारिक मतभेदों और राजनीतिक दूरियों के बावजूद स्व. इंदिरा हृदयेश हमेशा छात्र नेताओं का पूरा सम्मान करती थीं और लोकतांत्रिक मर्यादाओं की सीमा में रहकर कार्य करती थीं, लेकिन मौजूदा प्रशासन का रवैया इसके बिल्कुल विपरीत है।
निष्पक्ष जाँच और दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की माँग
मेयर ने प्रशासन के उच्च अधिकारियों को चेतावनी देते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच कराने की पुरजोर माँग की है। उन्होंने कहा कि:
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लाठीचार्ज जैसी बल प्रयोग की घटना के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों को तुरंत चिन्हित किया जाए।
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जाँच में जो भी पुलिसकर्मी दोषी पाए जाते हैं, उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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छात्रसंघ चुनाव किसी भी यूनिवर्सिटी या कॉलेज की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा होते हैं, और इस दौरान किसी भी राजनीतिक या छात्र पक्ष के साथ इस तरह का अनुचित व दमनकारी व्यवहार नहीं होना चाहिए।
मेयर के इस तीखे बयान के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है और छात्र संगठनों के बीच भी प्रशासन के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा है।
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