बागेश्वर में बंदरों के आतंक से जनता को बड़ी राहत। वन विभाग की टीम ने चंडिका मंदिर के पास से 35 बंदरों को पकड़ा, कल गौमती पुल और मंडलसेरा में भी चलेगा अभियान।

सीमा खेतवाल संवाददाता देवभूमि जन हुंकार समाचार | बागेश्वर
देवभूमि जन हुंकार समाचार | बागेश्वर। बागेश्वर नगर क्षेत्र में बंदरों के बढ़ते उत्पात से परेशान लोगों के लिए वन विभाग ने रेस्क्यू अभियान चलाकर 35 बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई की है। चंडिका वार्ड स्थित चंडिका मंदिर के समीप चलाए गए इस अभियान को विभाग की एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हालांकि, नगर में बंदरों की समस्या कोई एक दिन में पैदा नहीं हुई है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या कुछ बंदरों को पकड़ लेने भर से आम जनता को लंबे समय तक राहत मिल पाएगी, या फिर कुछ दिनों बाद लोगों को दोबारा उसी परेशानी का सामना करना पड़ेगा?
बंदरों के उत्पात से परेशान स्थानीय लोगों को अब ऐसी व्यवस्था की उम्मीद है, जिससे उन्हें बार-बार शिकायत करने की जरूरत न पड़े। घरों की छतों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर बंदरों की मौजूदगी से लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। कई बार बंदरों के सामान छीनने, घरों में घुसने और बच्चों व राहगीरों के लिए खतरा पैदा करने की शिकायतें भी सामने आती हैं। ऐसे में यह समस्या केवल असुविधा तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि जनसुरक्षा से भी जुड़ जाती है।
चंडिका मंदिर के पास अभियान, 35 बंदरों को पकड़ा
प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) बागेश्वर प्रकाश चंद्र आर्य के निर्देशन में वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने चंडिका मंदिर के समीप विशेष अभियान चलाया। इस दौरान टीम ने कार्रवाई करते हुए 35 बंदरों को पकड़ लिया। विभाग की इस कार्रवाई के बाद प्रभावित क्षेत्र के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, इस अभियान की वास्तविक सफलता का आकलन केवल पकड़े गए बंदरों की संख्या से नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में क्षेत्र में बंदरों के उत्पात और शिकायतों में होने वाली कमी से किया जाएगा। यदि समस्या दोबारा सामने आती है, तो विभाग को अभियान की निरंतरता और अन्य प्रभावी उपायों पर भी ध्यान देना होगा।
जनता परेशान, क्या पहले से नहीं थी समस्या की जानकारी?
बागेश्वर में बंदरों के उत्पात को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए और आगे ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो, इसके लिए क्या व्यवस्था की जाएगी?
वन विभाग की कार्रवाई निश्चित रूप से राहत की उम्मीद जगाती है, लेकिन नागरिकों की अपेक्षा केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि समस्या के प्रभावी प्रबंधन की है। लोगों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और वन्यजीवों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाना विभाग के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
गौमती पुल और मंडलसेरा में भी चलेगा अभियान
वन विभाग के अनुसार, बंदरों को पकड़ने का अभियान आगे भी जारी रहेगा। इसी क्रम में गौमती पुल के समीप और मंडलसेरा क्षेत्र में भी रेस्क्यू अभियान चलाने की योजना है। अब इन क्षेत्रों के लोगों की निगाहें वन विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि अभियान केवल कुछ चिन्हित स्थानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन इलाकों में भी प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, जहां बंदरों के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। साथ ही, अभियान के बाद स्थिति की निगरानी करना भी जरूरी होगा, ताकि यह पता चल सके कि कार्रवाई से वास्तव में कितनी राहत मिली।
बंदर पकड़े गए, लेकिन स्थायी समाधान की चुनौती बाकी
बंदरों की समस्या का समाधान केवल उन्हें पकड़ने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए वन्यजीव संरक्षण के नियमों के अनुरूप सुरक्षित रेस्क्यू, उचित प्रबंधन और समस्या के दोबारा बढ़ने के कारणों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
DFO प्रकाश चंद्र आर्य के निर्देशन में शुरू हुए इस अभियान से लोगों को राहत की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन वन विभाग के सामने असली चुनौती इस राहत को बरकरार रखने की होगी। गौमती पुल और मंडलसेरा में प्रस्तावित अभियान के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या बंदरों के उत्पात में वास्तविक कमी आती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या वन विभाग का यह अभियान बागेश्वर की जनता को बंदरों के आतंक से स्थायी राहत दिला पाएगा, या फिर लोगों को आगे भी इसी समस्या से जूझना पड़ेगा?
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