देवभूमि जन हुंकार समाचार | हल्द्वानी। हल्द्वानी की विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी को 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसके साथ ही पीड़िता को चार लाख रुपये प्रतिकर (मुआवजा) देने के आदेश दिए हैं।
इस मामले में उत्तराखंड राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक गोकुल चंद्र पनेरू ने पैरवी की। विशेष पॉक्सो जज सविता चमोली की अदालत ने मामले में दोष सिद्ध होने के बाद यह सजा सुनाई।
अदालत ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(क)/6: 20 वर्ष का सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये का जुर्माना। जुर्माना जमा नहीं करने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास और भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(2) के तहत भी दोषी को दो साल के सश्रम कारावास और तीन हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। जुर्माना जमा नहीं करने पर छह माह तथा तीन हजार रुपये के अर्थदंड के लिए दो माह के अतिरिक्त कारावास का प्रावधान आदेश में दर्ज है।
अदालत ने निर्देश दिया कि दोषी पहले से जेल में जितनी अवधि बिता चुका है, उसे सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा। पीड़िता को चार लाख रुपये प्रतिकर दिलाने के लिए आदेश की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल को भी भेजी गई है।
विशेष लोक अभियोजक गोकुल चंद्र पनेरू की पैरवी वाले इस मामले में अदालत के फैसले के बाद दोषी को 20 साल की सजा और पीड़िता को चार लाख रुपये प्रतिकर देने का आदेश दिया गया है।
देवभूमि जन हुंकार समाचार इस मामले में न्यायालय के आदेश में दर्ज तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करता है।
नोट: नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली कोई जानकारी प्रकाशित नहीं की गई है।
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