देवभूमि जन हुंकार, पिथौरागढ़ / हल्द्वानी / देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड के पर्वतीय जनपद पिथौरागढ़ से स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलने वाली एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। जनपद के जिला महिला अस्पताल में प्रसव के दौरान एक गर्भवती महिला और उसके नवजात शिशु की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। इस दर्दनाक घटना के बाद से अस्पताल की प्रसव सेवाओं, चिकित्सा अधिकारियों की कार्यप्रणाली और आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था पर बहुत ही गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रसव के बाद अचानक बिगड़ी तबियत, सामान्य वार्ड में तोड़ा दम
प्राप्त विवरण और वायरल खबरों के अनुसार, पिथौरागढ़ जिला महिला अस्पताल में प्रसव के समय जच्चा और बच्चा दोनों की जान चली जाने से परिजनों में कोहराम मच गया है। प्रसव के तुरंत बाद महिला रेखा देवी की तबियत अचानक बहुत अधिक बिगड़ गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें ऑपरेशन थियेटर (OT) से सामान्य वार्ड में लाया गया था, लेकिन कुछ ही देर बाद महिला ने भी दम तोड़ दिया। इसके साथ ही नवजात शिशु के भी मृत पैदा होने की बात सामने आई है। माँ और नवजात की एक साथ हुई असमय मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
अत्यधिक रक्तस्राव की आशंका, स्वास्थ्य विभाग की जाँच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल महिला की मौत का वास्तविक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े जानकारों और सूत्रों के अनुसार प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (Postpartum Hemorrhage) होने की आशंका जताई जा रही है, जिसके कारण महिला की स्थिति तेजी से बिगड़ी होगी। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
महिला की हालत अचानक क्यों बिगड़ी और उसे बचाने के लिए अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा किस प्रकार का चिकित्सीय उपचार दिया गया, इन तमाम गंभीर सवालों के जवाब केवल स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक जाँच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
अस्पताल प्रबंधन की चुप्पी और सीएमएस से संपर्क न होना
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान जिला महिला अस्पताल की कार्यप्रणाली अत्यंत संदेहास्पद और गैर-जिम्मेदाराना रही है। शुक्रवार को अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों ने मीडिया या अन्य लोगों को इस मामले की कोई भी जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया। वहीं, अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. भागीरथी गब्र्याल से भी इस संबंध में संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गहरे सदमे और रोष में डूबे परिजन बिना किसी पुलिसिया या कानूनी कार्रवाई तथा बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव को सीधे घर ले गए।
स्वास्थ्य सुविधाओं पर खड़े हुए बड़े सवाल
जिला महिला अस्पताल में हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने पर्वतीय क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को उपलब्ध कराई जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रसव के बाद अचानक उत्पन्न होने वाली आपातकालीन स्थितियों से निपटने की अस्पताल की व्यवस्था की पोल खोल दी है।
यदि प्रसव के बाद महिला को अत्यधिक रक्तस्राव हुआ था, तो उसकी स्थिति की गंभीरता को समय रहते क्यों नहीं संभाला गया और समय पर उच्च स्तरीय चिकित्सा सहायता क्यों उपलब्ध नहीं कराई गई, यह जाँच का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बिंदु होना चाहिए। हालांकि, जाँच पूरी होने से पहले अस्पताल के किसी कर्मचारी या चिकित्सक को सीधे तौर पर दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन अब संपूर्ण स्वास्थ्य विभाग की जाँच रिपोर्ट पर ही सभी की निगाहें टिकी हैं। रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकेगा कि रेखा देवी की हालत बिगड़ने के पीछे असली वजह क्या थी। इस दर्दनाक हादसे ने एक हंसते-खेल्ते परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया है।
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