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Uttarakhand Crime Concept Representing Court Ordered FIR and Bank Fraud Investigation in Haldwani
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देवभूमि जन हुंकार, हल्द्वानी / नैनीताल: देवभूमि उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर से विश्वासघात, जालसाजी और पारिवारिक विवाद का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। हल्द्वानी में एक पति ने अपनी ही पत्नी के साथ ऐसा शातिर फरेब किया कि सुनने वाले दंग रह गए। पत्नी के नाम से बैंक में खाता खुलवाकर उसमें जमा रकम कथित तौर पर चुपचाप निकालने और उस फर्जी बैंक लेन-देन का इस्तेमाल अदालत में चल रहे भरण-पोषण (Maintenance) के मुकदमे में पत्नी के खिलाफ करने के मामले में अदालत के सख्त आदेश पर बनभूलपुरा पुलिस ने पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

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बेटी के जन्म के बाद सरकारी सहायता का झांसा देकर खुलवाया गया था खाता

पीड़िता की ओर से अदालत में पैरवी कर रहे अधिवक्ता मोहम्मद रिजवान ने पूरे मामले की जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रथम न्यायिक मजिस्ट्रेट, हल्द्वानी की अदालत ने मामले में उपलब्ध तमाम दस्तावेजों का बारीकी से अवलोकन करने के बाद प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना करने के स्पष्ट आदेश दिए थे। इसके बाद 21 अक्टूबर 2026 को थाना बनभूलपुरा में एफआईआर दर्ज की गई।

मामले की शुरुआत 9 अप्रैल 2024 से हुई, जब पीड़िता ने हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में एक बेटी को जन्म दिया था। आरोप है कि 14 अप्रैल को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जब वह प्रसव की कमजोरी के चलते बिस्तर पर थीं, तब उनके पति एक व्यक्ति को घर लेकर आए। उस व्यक्ति ने खुद को बंधन बैंक का कर्मचारी बताया और कुछ दस्तावेजों पर पीड़िता के हस्ताक्षर करा लिए। पीड़िता को बताया गया था कि बेटी के बालिग होने पर सरकार की तरफ से 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने के लिए उनके नाम पर बैंक खाता खुलवाना अनिवार्य है। लेकिन इसके बाद उन्हें कभी चेकबुक या डेबिट कार्ड नहीं मिला।

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खाते में आए 1.68 लाख, और चुपचाप निकाल लिए गए 1.67 लाख रुपये

अदालत में प्रस्तुत किए गए बैंक स्टेटमेंट के अनुसार, 1 अप्रैल 2024 से 8 मई 2025 के बीच इस खाते में कुल 1,68,206.02 रुपये जमा हुए, जबकि इसी अवधि के दौरान 1,67,938.28 रुपये निकाल लिए गए। खाते में अंततः मात्र 267.74 रुपये ही शेष बचे।

पीड़िता का मुख्य आरोप है कि खाते में रकम जमा होने के बाद एटीएम के जरिए लगातार निकासी की जाती रही, जबकि उन्हें खाते के संचालन की दूर-दूर तक कोई जानकारी नहीं थी। शातिरन इस पूरे बैंक विवरण और स्टेटमेंट का इस्तेमाल परिवार न्यायालय में चल रहे भरण-पोषण के मामले में उनके विरुद्ध साक्ष्य के रूप में पेश कर दिया गया।

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डाक विभाग और बैंक के दस्तावेजों से खुली पोल, कोर्ट ने माना प्रथम दृष्टया छल

मामले में बैंक और डाक विभाग के दस्तावेज निर्णायक साबित हुए। अदालत के आदेश में बंधन बैंक के 10 जुलाई 2025 के पत्र और डाक विभाग की डिलीवरी रिपोर्ट का विशेष उल्लेख है। रिकॉर्ड गवाही देते हैं कि खाते की चेकबुक और डेबिट कार्ड वाला वेलकम किट 27 अप्रैल 2024 को डिलीवर किया गया था। डिलीवरी रिकॉर्ड में प्राप्तकर्ता के हस्ताक्षर के साथ एक मोबाइल नंबर भी दर्ज था।

जाँच में सामने आया कि यह मोबाइल नंबर पीड़िता के पति का है और बैंक खाते से जुड़ी सारी ओटीपी व जानकारी उसी नंबर पर जाती रही, जबकि पत्नी को चेकबुक या एटीएम कभी हाथ भी नहीं लगे। पुलिस की प्रारंभिक जाँच में एटीएम से पैसे निकालने वाली महिला की पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी थी (सीसीटीवी में बुर्का पहनी महिला दिखी थी)।

प्रथम न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने 15 अक्टूबर 2026 को पारित अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों से प्रथम दृष्टया छल और खाते के अनधिकृत संचालन का संज्ञेय अपराध बनता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पति-पत्नी के बीच भरण-पोषण का विवाद लंबित होने मात्र से आपराधिक जाँच पर रोक नहीं लग सकती। बैंक, डाक विभाग और दूरसंचार रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद पुलिस ने पति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की आगे की गहन विवेचना जारी है।

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By admin