सरकारी विज्ञापन
Uttarakhand Inspirational Concept Representing Maya Kandpal State Bravery Award and Heroic Act in Champawat
Spread the love

देवभूमि जन हुंकार, चंपावत / देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड की बेटियां अपनी मेहनत, प्रतिभा और संस्कारों के साथ-साथ अपने अदम्य साहस के लिए भी पूरे देश में मिसाल पेश कर रही हैं। जनपद चंपावत से एक ऐसी ही दिल को छू लेने वाली और गर्व से भर देने वाली खबर सामने आ रही है। चंपावत की 17 वर्षीय होनहार और जांबाज बेटी माया कांडपाल को अपनी जान की परवाह किए बिना उफनती नदी में कूदकर अपनी दो सहपाठियों की जान बचाने के अौसाधारण शौर्य के लिए ‘मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। आगामी 6 नवंबर को राजधानी देहरादून में आयोजित होने वाले भव्य समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान करेंगे।

यह भी पढ़ें 👉देवभूमि के पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए बड़ी सौगात; कैंची धाम और भवाली क्षेत्र को जाम से मिलेगी मुक्ति, 21.81 करोड़ से बनेगा 10.5 किमी लंबा बाईपास

5 अगस्त 2025 का वह दिन, जब उफनती नदी में बहने लगी थीं दो सहेलियां

प्रशासनिक और स्थानीय विवरण के अनुसार, विकासखंड चंपावत के अंतर्गत आने वाले घुरचुम गांव की रहने वाली माया कांडपाल ने गत वर्ष यानी 5 अगस्त 2025 को यह असाधारण और ऐतिहासिक साहस दिखाया था। उस दिन क्षेत्र में भारी बारिश हो रही थी, जिसके कारण सड़कें भूस्खलन (Landslide) के चलते पूरी तरह बाधित थीं।

अपनी परीक्षा देने के लिए स्कूल जा रही माया अपनी अन्य सहेलियों के साथ एक नदी को पार कर रही थी। इसी दौरान अचानक आए तेज बहाव की चपेट में आकर उसकी दो सहेलियां, कोमल और आरती, गहरे पानी में बहने लगीं। सहेलियों को मौत के मुँह में जाते देख माया ने एक पल की भी देर नहीं लगाई और अपनी जान की परवाह किए बिना उफनती हुई नदी में छलांग लगा दी।

यह भी पढ़ें 👉बहादराबाद में कलयुगी पिता गिरफ्तार! नाबालिग बेटी के साथ करता था अश्लील हरकतें

घायल होने और चप्पलें बहने के बावजूद नहीं मानी हार, स्कूल पहुँचकर दी परीक्षा

नदी के तेज बहाव और खतरों से जूझते हुए माया ने अपने अथक और साहसिक प्रयासों से दोनों छात्राओं को सुरक्षित बाहर खींच लिया। उनके इस त्वरित और जांबाज कदम से दोनों बालिकाओं की बहुमूल्य जिंदगी बच गई। हालांकि, इस कठिन बचाव अभियान के दौरान माया स्वयं भी घायल हो गईं और उनकी चप्पलें भी पानी में बह गईं, लेकिन उनके हौसले और हिम्मत में कोई कमी नहीं आई।

यह भी पढ़ें 👉सितारगंज में पेरेंट्स मीटिंग में जा रही मां और दो मासूम बेटियों को तेज रफ्तार कार ने रौंदा, मां और 6 साल की बेटी की दर्दनाक मौत

अपनी सहेलियों को सुरक्षित बचाने के बाद वह बिना डरे स्कूल पहुँची और अपनी परीक्षा भी पूरी निष्ठा के साथ दी। अपनी इस जिजीविषा और बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए वर्ष 2026 में उन्होंने अपनी इंटरमीडिएट की परीक्षा 86.6 फीसदी अंकों के साथ शानदार सफलता के साथ उत्तीर्ण की। उनकी इस वीरता का संज्ञान लेते हुए जिला स्तरीय चयन समिति की संस्तुति पर महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग ने उन्हें इस सर्वोच्च बाल वीरता पुरस्कार के लिए चयनित किया है। उत्तराखंड सरकार द्वारा मिलने वाले इस सम्मान से पूरे चंपावत जिले और उनके पैतृक गांव में जश्न का माहौल है।

👉 देवभूमि जन हुंकार व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ को लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल सब्स्क्राइब करें


Spread the love

By admin