हल्द्वानी में बाट-माप विभाग के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा: फर्जी बिल बुक से व्यापारियों से की लाखों की अवैध वसूली; आरोपी गिरफ्तार! 👇
हल्द्वानी: विधिक माप विज्ञान (बाट-माप) विभाग के नाम पर फर्जी बिल बुक तैयार कर व्यापारियों से सत्यापन और मरम्मत शुल्क के नाम पर अवैध वसूली करने का एक बड़ा और सनसनीखेज मामला सामने आया है। पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ तब हुआ जब मंगल पड़ाव क्षेत्र में एक स्वर्णकार (ज्वैलर) ने डायल-112 पर एक व्यक्ति द्वारा अभद्रता किए जाने की शिकायत दर्ज कराई। मौके पर पहुँची पुलिस की पूछताछ और विभागीय अधिकारियों की पड़ताल में आरोपी के पास से एक अधिकृत और दूसरी पूरी तरह फर्जी बिल बुक बरामद हुई, जिससे इस बड़े रैकेट का पर्दाफाश हो गया।
‘रोहित एसोसिएट्स’ के नाम से चल रहा था फर्जीवाड़ा, रामनगर का आरोपी गिरफ्तार
जांच में सामने आया कि आरोपी मनीष, निवासी लखनपुर (रामनगर), अपनी अधिकृत फर्म ‘मनीष एसोसिएट्स’ के साथ-साथ ‘रोहित एसोसिएट्स’ के नाम से समानांतर फर्जी बिल बुक का इस्तेमाल कर रहा था। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ‘रोहित एसोसिएट्स’ नाम की कोई भी लाइसेंसधारी मरम्मतकर्ता फर्म विभाग में पंजीकृत ही नहीं है।
प्रारंभिक तफ्तीश में पता चला है कि आरोपी ने इस फर्जी बिल बुक के सहारे हल्द्वानी, भवाली, किच्छा, बाजपुर, दिनेशपुर रोड, नेताजी नगर और जयनगर-01 सहित कुमाऊँ के कई क्षेत्रों के व्यापारियों से सरकारी सत्यापन एवं मरम्मत शुल्क के नाम पर मोटी रकम ऐंठ ली। व्यापारियों से ली गई इस राशि को सरकारी खजाने में जमा कराने के बजाय आरोपी खुद हड़प जाता था।
कुमाऊँ के कई शहरों में फैला नेटवर्क, जांच के लिए बनी संयुक्त टीम
कुमाऊं संभाग के प्रभारी उप नियंत्रक ललित मोहन पंत ने बताया कि 16 जुलाई को हल्द्वानी में मामला उजागर होने के बाद 17 जुलाई को दिनेशपुर क्षेत्र से भी आरोपी के खिलाफ शिकायत मिली। मामले की गंभीरता को देखते हुए हल्द्वानी, किच्छा और बाजपुर के वरिष्ठ निरीक्षकों की एक संयुक्त जांच टीम गठित की गई है।
विभाग अब फर्जी बिल बुक में दर्ज सभी व्यापारियों के बयान दर्ज कर अवैध वसूली की वास्तविक रकम और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों की जांच कर रहा है।
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व्यापारियों के लिए चेतावनी और सख्त कानूनी कार्रवाई
उप नियंत्रक ने जानकारी दी कि पूरे कुमाऊं संभाग में विभाग के कुल 80 लाइसेंसधारी मरम्मतकर्ता पंजीकृत हैं, जबकि केवल हल्द्वानी में 13 अधिकृत मरम्मतकर्ता कार्यरत हैं। उन्होंने व्यापारियों से अपील की है कि सत्यापन या मरम्मत शुल्क का भुगतान करने से पहले संबंधित व्यक्ति के पहचान पत्र और विभागीय प्राधिकरण की जांच अवश्य कर लें।
फिलहाल वरिष्ठ निरीक्षक, जयनगर चौकी (दिनेशपुर) की ओर से पुलिस को तहरीर दे दी गई है। आरोपी के खिलाफ सरकारी दस्तावेजों में कूटरचित फर्जीवाड़ा करने, विभाग के नाम पर धोखाधड़ी, अवैध वसूली और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुँचाने की संगीन धाराओं में कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
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