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सेलाकुई में नकली दवा बनाने वाला रैकेट ध्वस्त, सरगना दंपति सहित 12 आरोपी जेल भेजे गए

देहरादून। उत्तराखंड एसटीएफ ने सेलाकुई में संचालित नकली दवा बनाने वाले बड़े रैकेट का खुलासा कर सरगना दंपति को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरोह कोरोना काल के दौरान नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन तक बना और बेच चुका है।

एसटीएफ ने गुरुवार को रैकेट के मुख्य संचालक प्रदीप कुमार और उसकी पत्नी श्रुति डावर (निवासी पानीपत, हरियाणा) को पंजाब के जीरकपुर से दबोचा। दोनों को दून लाकर पूछताछ के बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

एसटीएफ के मुताबिक, नकली दवाओं के इस रैकेट में पहले ही पांच फैक्ट्री मालिक, सप्लायर और रैपर प्रिंटिंग से जुड़े कुल 12 आरोपी गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं।
मामले का पर्दाफाश तब हुआ, जब 1 जून को सेलाकुई इंडस्ट्रियल एरिया से आरोपी संतोष कुमार को नकली दवा रैपर, बॉक्स और क्यूआर कोड सहित गिरफ्तार किया गया। इसके बाद केस की जांच एसटीएफ को सौंप दी गई।

रैकेट का संचालन ऐसे होता था

  • प्रदीप कुमार ने अपनी पत्नी के नाम पर साईं फार्मा नाम से फर्म बनाई थी।

  • वह और उसका साथी नवीन बंसल मिलकर नकली दवाओं के आउटर बॉक्स बनवाते थे।

  • दवा पैकिंग के लिए एल्युमिनियम फॉयल बद्दी (हिमाचल) की एक फर्म से मंगाई जाती थी।

  • नकली टैबलेट्स देहरादून, हरिद्वार और भिवाड़ी की फैक्ट्रियों में तैयार होती थीं।

  • राज्यों में सप्लाई के लिए पंचकुला की एक एंबुलेंस का इस्तेमाल किया जाता था।

  • प्रदीप का मेडिकल स्टोर एपी मेडिकोज (पानीपत) नेटवर्क का अहम हिस्सा था, जिसके जरिए दवाएं उत्तराखंड, यूपी, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा समेत छह राज्यों में बेची जाती थीं।

एसटीएफ प्रमुख नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि प्रदीप कुमार पहले भी 2021 में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने के मामले में गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है। रिहा होने के बाद उसने दोबारा नकली दवाओं का कारोबार शुरू किया।

जांच में सामने आया कि आरोपी प्रदीप के बैंक खातों में पिछले दो वर्षों में करीब 14 करोड़ रुपये के लेनदेन नकली दवाओं की बिक्री से जुड़े हैं। इसके अलावा भारी रकम नकदी में भी ली-दी गई। एसटीएफ अब सभी खातों की ट्रांजेक्शन खंगाल रही है और यह भी जांच रही है कि किन कंपनियों से फर्जी दवाएं खरीदी गईं।

फिलहाल मुख्य आरोपी दंपति सहित 12 लोग जेल में हैं। एसटीएफ की जांच जारी है कि कहीं और फैक्ट्रियां भी इस काले धंधे में शामिल तो नहीं।


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