उत्तराखंड शिक्षा विभाग का ऐतिहासिक फैसला: LT शिक्षकों का 20 साल पुराना वरिष्ठता विवाद खत्म, करीब 4000 शिक्षक होंगे प्रभावित! 👇
देहरादून: उत्तराखंड के माध्यमिक शिक्षा विभाग में लंबे समय से अटके और बेहद पेचीदा सहायक अध्यापक एलटी (LT) शिक्षकों के वरिष्ठता विवाद के समाधान की दिशा में धामी सरकार और शिक्षा निदेशालय ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। लोक सेवा प्राधिकरण और माननीय उच्च न्यायालय के सख्त रुख के बाद, शिक्षा निदेशालय ने वर्ष 1992 से 1996 के दौरान नियुक्त हुए एलटी शिक्षकों की अनंतिम वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप (Finalize) देने के कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग के इस बड़े निर्णय से जहां वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित सीधी भर्ती के शिक्षकों को न्याय मिला है, वहीं दूसरी ओर विभाग के इस कदम से करीब 4,000 शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित होने जा रही है!
क्या था पूरा वरिष्ठता विवाद? (सीटी संवर्ग बनाम आयोग सीधी भर्ती)
इस पूरे मामले के विधिक और तकनीकी पहलुओं को समझें तो यह पूरा विवाद सीटी (CT) संवर्ग के शिक्षकों के संविलियन/समायोजन और लोक सेवा आयोग से चयनित सीधी भर्ती के एलटी शिक्षकों के बीच का था। वरिष्ठ शिक्षक और मुख्य याचिकाकर्ता रूपचंद्र लखेड़ा के अनुसार, विभाग ने वर्ष 2005 में नियमों को ताक पर रखकर सीटी संवर्ग के शिक्षकों को मात्र 5 वर्ष की सेवा पर सहायक अध्यापक एलटी में समायोजित कर उन्हें वरिष्ठता का अनुचित लाभ दे दिया था।
जबकि विधिक नियमानुसार, सीटी संवर्ग के शिक्षकों को एलटी में संविलियन के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा पूरी करना अनिवार्य था। विभाग के इस गलत फैसले के कारण लोक सेवा आयोग से चयनित सीधी भर्ती के शिक्षक वरिष्ठता सूची में करीब 7,000 क्रमांक नीचे खिसक गए (कनिष्ठ हो गए) और वर्षों तक अपनी जायज पदोन्नति (Promotion) से पूरी तरह वंचित रहे।
ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट की सख्ती के बाद झुका विभाग, 9 जुलाई को जारी हुए आदेश
इस घोर विधिक अन्याय के खिलाफ वरिष्ठ शिक्षक रूपचंद्र लखेड़ा व तीन अन्य शिक्षकों ने लोक सेवा प्राधिकरण (कोर्ट) में चुनौती देते हुए निष्पादन याचिका दायर की थी। इसके बाद प्रेमलता बौडाई व अन्य आठ याचिकाओं में भी माननीय अदालत ने अंतिम रूप से निर्णय पारित करते हुए उन याचिकाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया।
मामले की गंभीरता और कोर्ट की अवमानना याचिका पर कड़ा संज्ञान लेते हुए विभाग ने शासन के 25 जनवरी 2024 के आदेशों के अनुक्रम में आखिरकार 09 जुलाई 2026 को अंतिम निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके अलावा 7 जुलाई 2026 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा तदर्थ शिक्षकों से संबंधित वाद का भी अंतिम निस्तारण किया जा चुका है।
शिक्षा निदेशक के आदेश की 3 मुख्य बातें:
माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा जारी सख्त विधिक निर्देशों के तहत निम्नलिखित बड़े बदलाव किए गए हैं:
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10 वर्ष की सेवा अनिवार्य: सीटी संवर्ग के शिक्षकों को अब उनकी मूल नियुक्ति तिथि से 10 वर्ष की विधिक सेवा पूर्ण करने के बाद ही एलटी संवर्ग में वरिष्ठता (Seniority) का वास्तविक लाभ दिया जाएगा।
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आयोग से चयनितों को वरीयता: इसके परिणामस्वरूप, लोक सेवा आयोग से चयनित सहायक अध्यापक एलटी को उनकी पूर्व की भांति विशेष वरीयता (जैसे वर्ष 2001 में प्रदान की गई थी) वापस बहाल की जाएगी।
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मंडलों को कड़े निर्देश: अपर शिक्षा निदेशक गढ़वाल एवं कुमाऊं मंडल को तत्काल प्रभाव से वर्ष 1992 से 1996 तक के एलटी शिक्षकों की अंतिम ज्येष्ठता सूची (Final Seniority List) तैयार कर निदेशालय को उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं।
परिणाम: 4 हजार शिक्षक होंगे कनिष्ठ, पदोन्नति का रास्ता साफ
इस ऐतिहासिक सूची के लागू होने के बाद उत्तराखंड शिक्षा विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा फेरबदल होना तय है। इस निर्णय से आयोग द्वारा चयनित कई शिक्षक रातों-रात वरिष्ठता सूची में ऊपर आ जाएंगे, जबकि नियमों के विपरीत लाभ लेने वाले लगभग 4,000 शिक्षक सूची में कनिष्ठ (Junior) हो जाएंगे।
उत्तराखंड के शिक्षक समुदाय के एक बहुत बड़े वर्ग ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ‘न्याय की जीत’ बताया है। इस ऐतिहासिक विधिक सुधार से माध्यमिक शिक्षा विभाग में पिछले कई वर्षों से धूल फांक रही शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया का रास्ता भी पूरी तरह साफ हो गया है।
