Spread the love

रक्षाबंधन पर नहीं रहेगा भद्रा का साया, दिनभर के कई शुभ मुहूर्त

40 साल बाद बन रहे विशेष शुभ संयोग, रक्षा सूत्र बांधने का समय सुबह से शुरू

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाने वाला भाई-बहन के स्नेह का पावन पर्व रक्षाबंधन इस बार कई दृष्टि से खास है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष रक्षाबंधन भद्रा मुक्त रहेगा और दिनभर में रक्षा सूत्र बांधने के कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध होंगे। इतना ही नहीं, 40 वर्षों बाद ऐसे विशेष योग बन रहे हैं, जो पर्व की शुभता को कई गुना बढ़ा देंगे।

विशेष ग्रह योग और संयोग

ज्योतिषाचार्य विभोर इंदूसुत के अनुसार, इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा। दिन में सर्वार्थ सिद्धि योग और सौभाग्य योग का संयोग बन रहा है। साथ ही सूर्य और बुध के कर्क राशि में एक साथ होने से बुधादित्य योग बनेगा। बृहस्पति और शुक्र का मिथुन राशि में युति होना भी अत्यंत मंगलकारी है। इसके अतिरिक्त चंद्रमा का अपने ही नक्षत्र श्रवण में गोचर पर्व की महत्ता को और बढ़ा रहा है।

भद्रा समाप्त, मुहूर्त सुबह से शुरू

रक्षाबंधन से एक दिन पूर्व, 8 अगस्त को दोपहर 2:12 बजे भद्रा शुरू हुई थी, जो रात 1:48 बजे समाप्त हो गई। इसके बाद 9 अगस्त की सुबह से ही रक्षा सूत्र बांधने का शुभ समय प्रारंभ हो जाएगा।

राहुकाल में न बांधें राखी

ज्योतिषाचार्य रुचि कपूर के अनुसार, राहुकाल में राखी बांधने से बचना चाहिए। 9 अगस्त को राहुकाल सुबह 9:06 से 10:46 बजे तक रहेगा।

शुभ मुहूर्त व चौघड़िया

  • सुबह का शुभ चौघड़िया: 7:26 से 9:00 बजे तक (चर, लाभ और अमृत)

  • अभिजीत मुहूर्त: 11:59 से 12:53 बजे तक

  • लाभ-अमृत योग: 2:06 से 5:26 बजे तक

  • सांध्यकालीन लाभ चौघड़िया: 7:00 से 8:20 बजे तक

बहनों के लिए विशेष सुझाव

  • राखी बांधने का स्थान पूजा स्थल या पूर्वोत्तर दिशा हो।

  • पूजा की थाली में राखी, रोली, चावल, मिष्ठान, दीपक, सुगंध, इत्र और धूप अवश्य रखें।

  • भाई पूर्व दिशा की ओर मुख करके दाहिनी कलाई में राखी बंधवाएं।

  • भाई के हाथ में फूल और हल्दी से रंगे पीले चावल रखें।

  • विजय तिलक के बाद माथे पर अक्षत लगाएं।

  • राखी की तीन गांठें बांधना विशेष शुभ माना जाता है।

  • भाई प्रेमपूर्वक धनराशि या उपहार बहन को प्रदान करें।

इस बार का रक्षाबंधन न केवल भद्रा मुक्त है, बल्कि दुर्लभ ग्रह योगों से सजा हुआ भी है, जो भाई-बहन के रिश्ते को और भी मजबूत और मंगलमय बनाने का अवसर देगा।


Spread the love