उत्तराखंड क्रिकेट: फंड का ‘केला और पानी’ से पेट भरा! हाईकोर्ट में एसोसिएशन पर गंभीर आरोप
एक ही कंपनी को प्रीमियर लीग का ठेका देने और ₹2 करोड़ माफ करने का भी मामला
उत्तराखंड उच्च न्यायालय में उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन (UCA) द्वारा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से प्राप्त फंड के कथित दुरुपयोग और उसके उचित उपयोग न करने के संबंध में दायर याचिकाओं पर सुनवाई जारी है।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ इस बात पर सुनवाई कर रही है कि क्या ये याचिकाएँ सुनने योग्य (maintainable) हैं या नहीं।
- एसोसिएशन का पक्ष: UCA की तरफ से कोर्ट में तर्क दिया गया कि ये याचिकाएँ सुनवाई योग्य नहीं हैं और इन्हें निरस्त किया जाना चाहिए।
- याचिकाकर्ताओं का आरोप: याचिकाकर्ताओं (डॉ. बुद्धि चन्द रमोला, धीरज भंडारी और संजय गुसाईं) का कहना है कि UCA ने BCCI से खिलाड़ियों को सुविधा देने और खेल को बढ़ावा देने के लिए जारी किए गए 22 करोड़ रुपये से अधिक के फंड का दुरुपयोग अपने निजी हितों के लिए किया है। उनका आरोप है कि न तो खिलाड़ियों को पर्याप्त सुविधाएँ मिलीं और न ही खेलों का सही आयोजन हुआ।
- प्रीमियर लीग का ठेका: याचिकाकर्ताओं ने यह भी प्रश्न उठाया कि एसोसिएशन ने उत्तराखंड क्रिकेट प्रीमियर लीग का ठेका बिना सार्वजनिक किए एक ही कंपनी के मालिक को दे दिया, जो नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बोर्ड के सदस्यों ने फ्रेंचाइजी कंपनियों से आने वाले दो करोड़ रुपये और विज्ञापन शुल्क भी माफ कर दिया।
- सदस्यों को बाहर करना: याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि एसोसिएशन ने उन सदस्यों को बाहर कर दिया जो कथित दुरुपयोग के खिलाफ थे।
- BCCI का पक्ष: पूर्व के आदेश पर BCCI ने भी अपना पक्ष रखा और कोर्ट से मामले की अगली सुनवाई की तिथि दो सप्ताह बाद नियत करने का अनुरोध किया।
- याचिकाकर्ताओं का विरोध: याचिकाकर्ताओं ने BCCI के अनुरोध का विरोध करते हुए कहा कि मामले की अंतिम सुनवाई कल ही की जानी चाहिए, क्योंकि बाद में सुनवाई होने पर उनकी याचिकाओं का औचित्य समाप्त हो जाएगा।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने मामले की अंतिम सुनवाई कल भी जारी रखने का फैसला किया है। कोर्ट ने दोनों पक्षकारों से पूछा है कि वे किस आधार पर रिट याचिकाएँ सुनवाई योग्य हैं या नहीं (Maintainable or not) पर अपनी प्रतिक्रिया से न्यायालय को अवगत कराएँ। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से इस पूरे मामले की जाँच कराने और प्रीमियर लीग के टेंडर को सार्वजनिक करने की प्रार्थना की है।
