देवभूमि जन हुंकार, हल्द्वानी / नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के हल्द्वानी से न्यायपालिका के क्षेत्र में एक बेहद अहम और बड़ा फैसला सामने आया है। अदालत ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे अभियुक्त को सभी आरोपों से पूरी तरह दोषमुक्त (बरी) कर दिया है। इस मामले में बचाव पक्ष द्वारा पेश किए गए ठोस तर्कों, क्रॉस केस के दस्तावेजों और कानूनी नजीरों ने अभियोजन पक्ष के दावों को खारिज कर दिया।
अभियोजन पक्ष से प्राप्त विवरण के अनुसार, वर्ष 2016-17 से दोनों पक्षों के बीच जान-पहचान थी। आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2021 में खाना बनाने के बहाने घर बुलाकर और बाद में वर्ष 2023 में युवराज होटल में बुलाकर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए गए। अभियोजन ने यह भी दावा किया था कि दोनों परिवारों के बीच शादी की बात तय हुई थी और टीके के रूप में 21,000 रुपये व मिठाई भेजी गई थी। इसी आधार पर अभियुक्त के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्यवाही चल रही थी।
न्यायालय में अभियुक्त की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राजन सिंह मेहरा ने इस मामले की दूसरी और वास्तविक तस्वीर अदालत के सामने रखी। अधिवक्ता मेहरा ने कोर्ट को बताया कि दिनांक 4 अप्रैल को पीड़िता के चाचा और फूफा अभियुक्त के घर में घुस आए थे और उसकी मां के साथ अनैतिक संबंध बनाने की कोशिश करते हुए उनके कपड़े फाड़ दिए थे। इस गंभीर घटना की तहरीर तत्काल थाना काठगोदाम में दी गई थी।
अधिवक्ता ने दलील दी कि उस आपराधिक कृत्य और मुकदमे से बचाव की नीयत से ठीक अगले दिन यानी 5 अप्रैल को पीड़िता द्वारा थाना काठगोदाम में तहरीर देकर अभियुक्त को इस मामले में फंसाया गया और जेल भिजवाया गया।
अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि पीड़िता ने इस मामले में होने वाले अनिवार्य मेडिकल परीक्षण से साफ इनकार कर दिया था। इसके अलावा, मुकदमे और जेल में बंद रहने के दौरान की जो परिस्थितियां सामने आईं, वे बेहद चौंकाने वाली थीं—पीड़िता और उसकी मां खुद दो बार जेल में अभियुक्त से मिलने गईं ।
अधिवक्ता राजन सिंह मेहरा ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों की कई महत्वपूर्ण नजीरें (Judicial Precedents) पेश करते हुए तर्क दिया कि लंबी अवधि तक चले संबंधों को केवल शादी से इंकार करने पर बलपूर्वक दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं माना जा सकता। पीड़िता के चाचा और फूफा के विरुद्ध चल रहे क्रॉस केस के प्रामाणिक दस्तावेज भी बचाव साक्ष्य के रूप में अदालत में प्रस्तुत किए गए।
दोनों पक्षों की लंबी बहस, पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्यों, मेडिकल से इनकार के तथ्यों, क्रॉस केस के दस्तावेजों और कानूनी परिस्थितियों का बारीकी से परीक्षण किया। अदालत ने सभी बिंदुओं पर विचार करने के बाद अभियुक्त को धारा 376 (दुष्कर्म) व 506 (आपराधिक धमकी) के सभी आरोपों से पूरी तरह बरी (दोषमुक्त) कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले से जहां एक ओर शिवम मौर्य को बड़ी राहत मिली है, वहीं कानूनी हलकों में इस फैसले की खासी चर्चा हो रही है।
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