वरिष्ठ पत्रकार इस्लाम हुसैन पर मुकदमे से उबाल, भाकपा माले का आरोप—अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सीधा हमला
हल्द्वानी। सामाजिक कार्यकर्ता, वरिष्ठ पत्रकार और उत्तराखण्ड सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष इस्लाम हुसैन पर पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मुकदमे को लेकर सियासी और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने इस कार्रवाई को निंदनीय बताते हुए मुकदमा तत्काल और बिना शर्त रद्द करने की मांग की है।
भाकपा माले की नैनीताल जिला कमेटी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस्लाम हुसैन के खिलाफ मुकदमा 4 जनवरी को हल्द्वानी कोतवाली में स्वघोषित गौ-रक्षकों की तहरीर के आधार पर दर्ज किया गया, जबकि पुलिस ने बिना गहन जांच-पड़ताल के बेहद तेजी से एफआईआर दर्ज कर दी, जो कई सवाल खड़े करती है।
पार्टी का कहना है कि इस्लाम हुसैन लंबे समय से संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से सामाजिक सद्भाव, कमजोर वर्गों और गरीबों के अधिकारों के लिए काम करते आ रहे हैं। उनके विचार और गतिविधियाँ सांप्रदायिक सोच रखने वाले तत्वों को हमेशा असहज करती रही हैं। ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
भाकपा माले ने बताया कि इस्लाम हुसैन पर आरोप है कि उन्होंने 2 अक्टूबर 2025 को उत्तराखण्ड ओपन यूनिवर्सिटी में गांधी जयंती के अवसर पर दिए गए उद्घाटन भाषण में कथित तौर पर धार्मिक भावनाएं आहत कीं और शांति भंग करने वाले बयान दिए। जबकि उस कार्यक्रम में मौजूद प्रोफेसर, विद्वान, पत्रकार, कर्मचारी और श्रोता—किसी ने भी भाषण पर आपत्ति दर्ज नहीं की। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से भी कोई शिकायत नहीं की गई थी।
पार्टी का आरोप है कि तीन महीने बाद अचानक मुकदमा दर्ज होना इस बात का संकेत है कि पूरी कार्रवाई एक सोची-समझी साजिश और राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है। भाकपा माले ने इसे भाजपा सरकार के इशारे पर की जा रही दमनात्मक कार्रवाई बताया है।
भाकपा माले ने सभी वामपंथी, प्रगतिशील और लोकतांत्रिक सोच रखने वाले संगठनों और नागरिकों से अपील की है कि वे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे वरिष्ठ नागरिक, समाजसेवी और पत्रकार इस्लाम हुसैन के समर्थन में आगे आएं और उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने की आवाज बुलंद करें।
जिला सचिव डॉ. कैलाश पाण्डेय ने कहा कि सरकार को संविधान और कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए, न कि असहमति की आवाज उठाने वालों को झूठे मुकदमों में फंसाने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस्लाम हुसैन पर दर्ज मुकदमा तत्काल रद्द किया जाना चाहिए, अन्यथा यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक मिसाल साबित होगा।
