उस्मान ठेकेदार रेप केसउस्मान ठेकेदार रेप केस
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नैनीताल रेप केस जांच में लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त, जांच अधिकारी पर ₹10,000 जुर्माना

नैनीताल: जांच में देरी पर हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती

नैनीताल रेप केस की जांच में लापरवाही बरतने पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने मामले की जांच अधिकारी पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया है। साथ ही आदेश दिया है कि 13 नवंबर तक सभी जरूरी दस्तावेज कोर्ट में प्रस्तुत किए जाएं।

यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि जांच अधिकारी बार-बार समय मांग रही थीं और अब तक पूरी रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई थी। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की लापरवाही गंभीर मामलों में अस्वीकार्य है।

30 अप्रैल को सामने आया था मामला, शहर में भड़का था विरोध

यह मामला 30 अप्रैल 2025 को सामने आया था जब नैनीताल के एक ठेकेदार उस्मान (73 वर्ष) पर नाबालिग से रेप का आरोप लगा था। घटना के बाद शहर में व्यापक विरोध-प्रदर्शन और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई थीं।

पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी उस्मान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में उसकी जमानत याचिका निचली अदालत ने खारिज कर दी थी। अब आरोपी ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की है।

हाईकोर्ट ने कहा कि जांच में देरी और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच अधिकारी निर्धारित समय में पूर्ण रिपोर्ट और साक्ष्य कोर्ट के समक्ष पेश करें।

आधिकारिक टिप्पणी:
“जांच प्रक्रिया में लापरवाही न्याय में देरी का कारण बनती है। ऐसे मामलों में सख्त अनुशासन आवश्यक है,” — कोर्ट की टिप्पणी।


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