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पूर्व विधायकों की पेंशन में बढ़ोतरी, सरकारी नौकरी में पेंशन पर ताला

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने एक बार फिर से ‘जनता की सेवा’ के नाम पर अपने नेताओं के लिए खुशियाँ बांटी हैं, लेकिन क्या जनता को इसका कुछ फायदा होगा? पिछले साल जहां विधायकों के वेतन में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई थी, वहीं इस बार पूर्व विधायकों की पेंशन में भी भारी इजाफा हो रहा है!

हालांकि, इस बार मामला पूर्व विधायकों की ‘बल्ले बल्ले’ से जुड़ा हुआ है, क्योंकि उनकी पेंशन में सीधे तौर पर 20,000 रुपये का इजाफा होने वाला है। और सिर्फ यही नहीं, उनके टेलीफोन और यात्रा भत्ते भी अब ‘सुलझे हुए’ होंगे! बुधवार को हुई धामी कैबिनेट की मीटिंग में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है, और अब ये प्रस्ताव विधानसभा के बजट सत्र में पास होने के लिए पटल पर रखा जाएगा।

सरकार का कहना है कि पूर्व विधायकों की पेंशन में हर साल 3,000 रुपये का इंक्रीमेंट होगा, लेकिन क्या यह सच में जनहित में है या सिर्फ नेताओं के ‘स्वार्थ’ को पूरा करने के लिए? बीते साल सितंबर में जब विधायकों के वेतन में एक लाख रुपये से अधिक का इजाफा हुआ था और उन्हें कैशलेस इलाज की सुविधा दी गई, तब से ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या सरकार वास्तव में जनता की भलाई के लिए काम कर रही है या सिर्फ अपने नेताओं के लिए।

उत्तराखंड के विधायकों का वेतन अब 2,90,000 रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये तक पहुंच चुका है, और जनता की हालत वही की वही। तो क्या ये कदम विधायक और पूर्व विधायकों की ‘सुख-सुविधा’ के लिए उठाए जा रहे हैं, जबकि आम आदमी की समस्याओं का हल अभी भी दूर है?

जनता की सेवा करने की बजाय, क्या नेता सिर्फ अपनी बल्ले बल्ले करने में ही लगे हुए हैं?


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