देवभूमि जन हुंकार, देहरादून / हरिद्वार: देवभूमि उत्तराखंड की चिकित्सा शिक्षा और नीट (NEET) काउंसलिंग प्रक्रिया में सेंध लगाने वाले शातिर गिरोहों के खिलाफ विशेष जाँच दल (SIT) ने एक बहुत बड़ा और कड़ा एक्शन लिया है। फर्जी दस्तावेजों और कूटरचित प्रमाण पत्रों के आधार पर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस (MBBS) की सीटें हथियाने के बहुचर्चित मामले में एसआईटी ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस ताज़ा कार्रवाई के साथ ही इस हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़े में गिरफ्तार कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है।
मुजफ्फरनगर, हरिद्वार और बिजनौर के आरोपी गिरफ्तार, बेटियों के दाखिले के लिए रची थी साजिश
प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, एसएसपी के कड़े निर्देशों के क्रम में एसपी ग्रामीण-1 जया बलूनी के कुशल नेतृत्व में गठित एसआईटी इस पूरे मामले की हर परत को खंगाल रही है। बीती 13 सितंबर को देहरादून के रायपुर और क्लेमेनटाउन थानों में सरकारी पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज बनवाने के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन आवेदन करने के संबंध में गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
जाँच के दौरान जब एसआईटी ने अभ्यर्थियों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों का भौतिक और तकनीकी सत्यापन कराया, तो वे पूरी तरह फर्जी पाए गए। इसी साक्ष्य के आधार पर एसआईटी ने जिन तीन नए आरोपियों को दबोचा है, उनमें शामिल हैं:
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प्रवीण कुमार (निवासी मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश)
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जगपाल सिंह (निवासी हरिद्वार, उत्तराखंड)
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रामपाल सिंह (निवासी बिजनौर, उत्तर प्रदेश)
एजेंट रूपेश पंडित के जरिए 25 से 30 लाख रुपये देकर बनवाए गए थे फर्जी दस्तावेज
पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने जो खुलासे किए हैं, उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा जगत में हड़कंप मचा दिया है। आरोपी प्रवीण कुमार और जगपाल सिंह ने पूछताछ में कुबूला कि उन्होंने अपनी बेटियों क्रमशः खुशी और स्वाति के एमबीबीएस में दाखिले के लिए पूर्व में गिरफ्तार किए जा चुके एजुकेशन कंसल्टेंट रूपेश पंडित से संपर्क साधा था।
पुलिस के अनुसार, रूपेश मेरठ में ‘मिकोडो (MECODO) पाठशाला’ नाम से कंपनी संचालित करता था और निजी विश्वविद्यालयों तथा विदेशी संस्थानों में विभिन्न पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर दाखिला दिलाने का काला धंधा चलाता था। आरोप है कि प्रवीण और जगपाल ने अपनी बेटियों के लिए फर्जी आधार कार्ड, स्थायी निवास प्रमाणपत्र और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार करवाए। इन कूटरचित दस्तावेजों के बल पर खुशी का मेडिकल कॉलेज में दाखिला करा दिया गया, जबकि स्वाति को नीट काउंसलिंग में शामिल कराया गया। इस पूरे फर्जीवाड़े के एवज में प्रवीण ने रूपेश को 25 लाख और जगपाल ने 30 लाख रुपये की मोटी रकम दी थी।
वहीं, तीसरे गिरफ्तार आरोपी रामपाल सिंह ने पूछताछ में बताया कि उसने अपने परिचित विशाल कुमार के साथ मिलकर अपनी बेटी तृप्ति के एमबीबीएस दाखिले के लिए फर्जी स्थायी निवास, आधार और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाए थे, जिसके आधार पर तृप्ति का हरिद्वार स्थित जीएमसी मेडिकल कॉलेज (GMC Medical College) में दाखिला कराया गया था।
एसआईटी की पैनी नजर, अन्य संलिप्तों की तलाश जारी
एसआईटी ने संबंधित शिक्षण संस्थानों से दाखिले से जुड़े तमाम मूल दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर जब अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जाँच की, तो सारे पते फर्जी निकले। इसी अकाट्य साक्ष्य के आधार पर तीनों आरोपियों को पूछताछ के लिए बुलाकर गिरफ्तार कर लिया गया है। एसआईटी का कहना है कि इस गिरोह के तार देश के अन्य हिस्सों से भी जुड़े हो सकते हैं, और जाँच में सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर आने वाले दिनों में और भी बड़ी गिरफ्तारियाँ की जा सकती हैं।
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