निजी हाथों में राजस्व रिकॉर्ड! नैनीताल में दो रजिस्ट्रार कानूनगो पर गिरी गाज, जिलाधिकारी की बड़ी कार्रवाई
नैनीताल, 7 मार्च। सरकारी राजस्व अभिलेखों को निजी व्यक्तियों से तैयार कराने का मामला सामने आने पर नैनीताल प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। गंभीर आरोपों की विभागीय जांच में पुष्टि होने के बाद जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने दो निलंबित रजिस्ट्रार कानूनगो को पदावनत करने का कड़ा फैसला सुनाया है।
प्रशासनिक अभिलेखों के अनुसार रजिस्ट्रार कानूनगो भूपेश चंद और अर्जुन सिंह बिष्ट पर आरोप था कि उन्होंने अपने पद से जुड़े संवेदनशील और वैधानिक राजस्व कार्य निजी एवं अनधिकृत व्यक्तियों से कराए। मामले को गंभीर मानते हुए प्रारंभिक जांच कराई गई, जिसके बाद विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।
जांच अधिकारी ने दस्तावेजी साक्ष्यों, सरकारी अभिलेखों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों के आधार पर पाया कि दोनों कार्मिकों ने राजस्व से जुड़े कामों में निजी व्यक्तियों की मदद ली। जांच प्रतिवेदन में आरोपों को पूरी तरह सही माना गया।
कारण बताओ नोटिस के जवाब में दोनों अधिकारियों ने स्वीकार किया कि अत्यधिक कार्यभार और लंबित मामलों के दबाव के कारण उन्होंने निजी व्यक्ति की सहायता ली थी। लेकिन प्रशासन ने साफ कर दिया कि कार्यभार का दबाव किसी भी अधिकारी को अपनी वैधानिक शक्तियां निजी हाथों में सौंपने की अनुमति नहीं देता।
प्रशासन ने इस कृत्य को गंभीर कदाचार, कर्तव्य में घोर लापरवाही और राजकीय शक्तियों के अवैध हस्तांतरण की श्रेणी में माना। साथ ही यह भी कहा कि राजस्व अभिलेखों जैसे संवेदनशील सरकारी दस्तावेजों में निजी व्यक्ति की भूमिका गोपनीयता और विश्वसनीयता के लिए बड़ा खतरा है।
मामले की गंभीरता और अधिकारियों द्वारा आरोप स्वीकार किए जाने को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने दोनों कार्मिकों, भूपेश चंद और अर्जुन सिंह बिष्ट को उनके वर्तमान पद से पदावनत करते हुए निम्न पद एवं वेतनमान पर आसीन किए जाने का दंड दिया है। आदेश के अनुसार यह दंड तत्काल प्रभाव से लागू होगा और इसे सेवा पुस्तिका में अंकित किया जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह आदेश किसी पृथक आपराधिक या विजिलेंस कार्यवाही को प्रभावित नहीं करेगा।
