देवभूमि जन हुंकार, हल्द्वानी / लोहाघाट: देवभूमि उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों के भीतर टिकट की दावेदारी और बैठकों का दौर अभी से परवान चढ़ने लगा है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर भी दिग्गज नेताओं ने अपने-अपने स्तर पर फील्डिंग सजाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। वरिष्ठ भाजपा नेता, उत्तराखंड सरकार में दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री एवं उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष हुकम सिंह कुंवर ने चंपावत जनपद की लोहाघाट सीट के साथ-साथ तराई-भाबर की हॉट सीट मानी जाने वाली हल्द्वानी विधानसभा सीट से भी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए अपना मजबूत दावा पेश कर दिया है।
“2002 से कर रहा हूँ टिकट के लिए आवेदन, इस बार पूरी उम्मीद”
मीडिया से बातचीत करते हुए हुकम सिंह कुंवर ने अपने लंबे राजनीतिक सफर और सांगठनिक अनुभवों को साझा किया। उन्होंने दो टूक कहा कि वह पार्टी के एक समर्पित सिपाही और राज्य आंदोलनकारी रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह अपने अब तक के राजनीतिक जीवन में पूर्व में दो बार हल्द्वानी विधानसभा और एक बार लोहाघाट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं।
अपनी टिकट की दावेदारी के इतिहास को याद करते हुए कुंवर ने बताया कि वह वर्ष 2002, 2007, 2012, 2017 और 2022 यानी पिछले कई विधानसभा चुनावों से लगातार पार्टी के समक्ष टिकट के लिए आवेदन करते आ रहे हैं। हालांकि किन्हीं कारणों और संगठनात्मक समीकरणों के चलते पूर्व में उन्हें पार्टी का टिकट नहीं मिल पाया था, लेकिन उनका हौसला कम नहीं हुआ है। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उन्होंने एक बार फिर लोहाघाट के साथ-साथ हल्द्वानी से भी अपना दावा ठोक दिया है। हुकम सिंह कुंवर ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि पार्टी इस बार उनके वर्षों के संघर्ष और समर्पण को देखते हुए उन्हें चुनावी मैदान में जरूर उतारेगी।
सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म
हुकम सिंह कुंवर द्वारा एक साथ दो प्रमुख विधानसभा सीटों (हल्द्वानी और लोहाघाट) से टिकट की दावेदारी पेश किए जाने के बाद से कुमाऊं मंडल के राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार पूरी तरह गर्म हो गया है। एक तरफ जहाँ हल्द्वानी सीट पर पहले से ही कई दिग्गज नेता अपनी दावेदारी जता रहे हैं, वहीं हुकम सिंह कुंवर जैसे वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी के उतरने से मुकाबला और अधिक रोचक हो गया है। अब देखना यह होगा कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उनके इस दोहरी सीट के दावे पर क्या रुख अपनाता है और किसे चुनावी समर में उतारता है।
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