Spread the love

चुनाव पर नहीं लगी रोक, लेकिन दोहरी मतदाता सूची को अवैध ठहराया गया

नैनीताल। उत्तराखंड में पंचायत चुनावों को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पंचायत चुनाव तय समय पर संपन्न हो सकते हैं और इस पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति को चुनाव प्रक्रिया को लेकर कोई आपत्ति है, तो वह चुनाव संपन्न होने के बाद चुनाव याचिका (Election Petition) के रूप में शिकायत दर्ज कर सकता है।

इस फैसले के बाद राज्य में पंचायत चुनावों को लेकर एक बार फिर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। कई उम्मीदवारों के नामांकन इस आधार पर रद्द हो सकते हैं कि उनके नाम शहरी (नगर निकाय) और ग्रामीण (पंचायत) दोनों मतदाता सूचियों में दर्ज हैं।

हाईकोर्ट ने दोहराया कि किसी भी व्यक्ति का नाम एक साथ दो मतदाता सूचियों—नगर निकाय और पंचायत—में नहीं होना चाहिए। अदालत ने ऐसे दोहरे नामांकन को अमान्य ठहराते हुए स्पष्ट किया कि यह चुनावी नैतिकता और पारदर्शिता के खिलाफ है और कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं हो सकता।

राज्य निर्वाचन आयोग ने इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटिशन) दायर की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया और 11 जुलाई को दिए गए अपने पूर्व आदेश को बरकरार रखा। आयोग की दलील थी कि मतदाता सूची में नाम होना चुनाव आयोग के क्षेत्राधिकार में आता है और यह पंचायतराज अधिनियम तथा संविधान के अनुच्छेद 243K के अंतर्गत सुरक्षित है। लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए दो टूक कहा कि दोहरी मतदाता सूची का मामला चुनावी नैतिकता से जुड़ा है और इसे कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव केवल उत्तराखंड पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप ही कराए जाएं।


Spread the love

You missed