हाईकोर्ट का सख्त रुख: लोकतंत्र से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, मतदान निष्पक्ष होना चाहिए
पुलिस पर उठे सवाल, कोर्ट ने कहा – निष्पक्षता सुनिश्चित करें
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने भी जताई चिंता, कोर्ट ने कहा- वकीलों का सम्मान करें।
नैनीताल में जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव के दिन सियासी हलचल चरम पर पहुंच गई, जब खबर सामने आई कि कुछ सदस्यों का कथित अपहरण कर लिया गया है। इस पर कांग्रेस समर्थित पक्ष ने तुरंत उच्च न्यायालय की शरण ली। याचिका में कहा गया कि एक राजनीतिक दल द्वारा जानबूझकर कुछ सदस्यों को जबरन उठाया गया है ताकि चुनाव परिणामों को प्रभावित किया जा सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने तत्काल सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की ओर से उपस्थित दस सदस्यों – देवकी बिष्ट, पूनम बिष्ट, पुष्पा नेगी, निधि जोशी, अनिता आर्या, जिशान्त कुमार, अर्नव कंबोज, मीना देवी, हेमचंद नैनवाल और संजय बोहरा – को हाईकोर्ट की सुरक्षा में मतदान केंद्र तक पहुंचाने के आदेश दिए। इस कार्य के लिए कोर्ट ने अपने सीओ रमेश बिष्ट को जिम्मेदारी सौंपी है।
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि पाँच सदस्य शहर से बाहर हैं और वे मतदान के लिए उपलब्ध नहीं हैं। इस पर कोर्ट ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रह्लाद नारायण मीणा को निर्देश दिए कि उन सभी पाँच सदस्यों को शीघ्र ढूंढकर मतदान में शामिल कराएं। साथ ही कोर्ट ने जिला अधिकारी वंदना सिंह और एसएसपी को शाम 4:30 बजे व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होकर स्थिति की जानकारी देने को कहा है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया कि पुलिस और सत्ताधारी पक्ष के लोग दिनदहाड़े सदस्यों को धमका रहे हैं, मारपीट कर रहे हैं और जबरदस्ती उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र को खुलेआम कुचला जा रहा है। इस पर अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा को रोकना प्रशासन और पुलिस की सीधी जिम्मेदारी है।
महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने सुनवाई के दौरान चिंता जताते हुए कहा कि न्यायालय में आकर राजनीतिक लोग दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यहां उपस्थित सभी अधिवक्ता बार के सम्मानित सदस्य हैं, और वे कानून के दायरे में अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका पर किसी तरह का दबाव अस्वीकार्य है।
कोर्ट का यह हस्तक्षेप ना केवल लोकतंत्र की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस प्रकार निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने में न्यायपालिका सक्रिय भूमिका निभा सकती है।
